उरई। मेडिकल कॉलेज में डिस्चार्ज होने वाले मरीज को ऑपरेशन टेबल में लिटाने के मामले में दो डॉक्टरों समेत पांच पर निलंबन की कार्रवाई से प्रबंधन में खलबली है। अब गठित टीम दो दिन बाद मरीज के भी बयान लेगी। इसके बाद और भी कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल जानकारी देने में प्रबंधन कन्नी काटता हुआ नजर आ रहा है।
माधौगढ़ कोतवाली क्षेत्र के डिकौली गांव निवासी ब्रजेश चौधरी (30) को आंतों में सूजन होने पर सोमवार को मेडिकल कॉलेज के वार्ड नंबर सात में भर्ती कराया गया था। उनको दो दिन तक भर्ती रहने की सलाह दी गई थी। बुधवार को ब्रजेश के डिस्चार्ज की तैयारी की जा रही थी। इसी बीच दो वार्डबॉय उसे जांच करवाने की बात कहकर ऑपरेशन थियेटर में ले गए और ऑपरेशन की तैयारी करने लगे थे।
मरीज ने बताया था कि उसे कपड़े पहना दिए गए और उसके शरीर में मार्क भी लगा दिए गए। लघुशंका जाने की बात कहकर ब्रजेश किसी तहत भागकर वार्ड में पहुंचा। वहां मौजूद डॉक्टर से पूछा तो उन्होंने कहा कि वार्डबॉय से गलती हुई है।
एक व्यक्ति के आंत में गांठ होने पर ऑपरेशन करना था। इसके बदले गलती से उसे ले आए। युवक ने आरोप लगाया था कि अगर वह समय रहते वहां से नहीं भागता तो शायद आज उसका ऑपरेशन कर दिया जाता। मामला डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के संज्ञान में आने पर उन्होंने गुरुवार को दो सदस्यीय टीम गठित की थी।
इसमें प्राचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी और डॉ. पुनीत अवस्थी ने जांच में दो डॉक्टर और तीन नर्स को दोषी पाया। इस पर डिप्टी सीएम ने कार्रवाई के आदेश दिए थे। प्राचार्य ने डॉ. सुधांशु शर्मा, डॉ. विशाल व स्टॉफ नर्स ऊषा देवी, अमरपाली, स्नेह प्रभा को निलंबित कर दिया था। साथ ही उन्हें प्राचार्य कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। मामले के लिए गठित टीम अब मरीज ब्रजेश चौधरी से दो दिन बाद बयान लेगी। उन बयानों के बाद और भी कार्रवाई होने की बात कही जा रही है। मरीज के परिजनों का कहना है कि इस पूरे मामले में और भी लोग शामिल थे।
वर्जन
पूरे मामले की गहनता से जांच चल रही है। 15 दिन की जांच के बाद टीम अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।
डॉ.अरविंद त्रिवेदी, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज, जालौन