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Jalaun News: दो जिलों को जोड़ने वाला मुहाना पुल क्षतिग्रस्त

Tue, 04 Feb 2025 12:36 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
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क्षतिग्रस्त मुहाना पुल पर दिखतीं सरिया। - फोटो : संवाद
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मुहम्मदाबाद (जालौन)। उरई-राठ मार्ग पर जालौन व हमीरपुर को जोड़ने के लिए बेतवा नदी पर बना मुहाना पुल पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। पुल के आसपास की सड़कें भी गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। हालात यह है कि पुल क्षतिग्रस्त होने से सरिया निकलकर बाहर आ गई हैं। ओवरलोड वाहन निकलते ही पुल में कंपन होने लगता है। दो किलोमीटर की सड़क पार करने में करीब एक घंटे का समय लगता है। यह मामला दोनों जिलों के बीच में फंसा है। लोगों का कहना है कि आधा पुल हमीरपुर और आधा जालौन में होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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जिले के डकोर क्षेत्र के मुहाना गांव के पास स्थित पुल का निर्माण वर्ष 1973 में शुरू हुआ था। दस साल तक चले काम के बाद एक किलोमीटर पुल को वर्ष 1983 में बनाकर कांग्रेस सरकार के तत्कालीन मंत्री राजा रणजीत सिंह जूदेव ने उद्घाटन किया था। तब से इसकी एक-दो बार मरम्मत की गई। लेकिन कोई काम नहीं होने पुल जर्जर हो गया।

मामला दो जिलों के बीच का होने के चलते इस पुल पर काम नहीं हो पा रहा है। यहां से प्रतिदिन करीब पांच हजार वाहनों का आवागमन होता है। लेकिन पुल के ऊपर से सरिया निकलने व आसपास की सड़क में गड्ढे होने से यहां से लोगों को जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ता है।
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मुहाना गांव निवासी हीरालाल, सुरेंद्र कुमार, राजकुमार, प्रदीप, वीरेंद्र, हिरदेश, बृजमोहन आदि ने बताया कि मुहाना तक जालौन की सीमा है। इसके बाद हमीरपुर की सीमा शुरू हो जाती है। हमीरपुर की सीमा का पहला गांव चिकासी है। लेकिन जर्जर पुल व आसपास की खराब गड्ढेदार दो किलोमीटर की सड़क में करीब एक घंटे का समय लगता है। बताया कि गड्ढे इतने बड़े हो गए हैं कि आधा वाहन उसी में समा जाता है। कई बार बसें व ट्रक इन गड्ढों में घुसकर पलट चुके हैं। लेकिन इसके बाद भी इस मार्ग का सुधार नहीं हो पा रहा है।
अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी सुनील कुमार ने कहा कि सड़क निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। कुछ हिस्सा हमीरपुर जिले में पड़ता है। जल्द ही सही करवा दिया जाएगा।

पुल क्षतिग्रस्त होने से कभी भी हो सकता है हादसा

डकोर गांव निवासी मनोज यादव ने बताया कि 699 मीटर लंबा पुल है। पुल की चौड़ाई 7.5 मीटर है। यह वर्ष 1973 में बनना शुरू हुआ और 1983 में बनकर तैयार हो गया। लेकिन अब यह पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है। कभी भी यहां बड़ा हादसा हो सकता है। शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है।

रास्ता जर्जर होने से आए दिन बस हो जाती है खराब



बस मालिक चतुर सिंह ने बताया कि पुल के दोनों ओर रास्ता जर्जर होने से आए दिन बस खराब हो जाती है। कई बार सरिया में फंसकर टायर फट जाते हैं। इससे नुकसान हो जाता है। सवारियों को बैठाने में भी अब तो डर लगा रहता है। खराब रास्ता निकलने के बाद ही राहत मिलती है।



सही नहीं हुआ पुल तो लगाना पड़ेगा पचास किलोमीटर का चक्कर



मुहाना निवासी हीरालाल ने बताया कि पुल के जर्जर हो जाने से मकरेचा, मुहाना, जैसारी, डकोर आदि गांवों के लोग हमीरपुर के चिकासी, गोहांड की ओर खेती करने जाते हैं। बताया कि अगर पुल समय रहते सही नहीं हुआ और टूट गया तो लोगों को करीब 50 किलोमीटर का चक्कर लगाकर आना पड़ेगा।

एंबुलेंस निकलने में होती सबसे अधिक परेशानी

ग्रामीण हृदेश ने बताया कि सबसे अधिक परेशानी हमीरपुर के राठ रोड से आने वाले लोगों को होती है। क्योंकि वहां कोई मेडिकल कालेज न होने से सभी मरीजों को उरई रेफर कर दिया जाता है। यहीं रास्ता होने से लोग जर्जर पुल व गड्ढों से होकर गुजरते हैं। कभी कभी तो मरीज समय से पहुंच नहीं पाता और रास्ते में ही उसकी मौत हो जाती है। प्रसव वाली महिलाओं को भी इसी परेशानी से जूझना पड़ता है।
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