उरई। जननी सुरक्षा योजना के 5000 लाभार्थियों को भुगतान नहीं मिला है। छह माह से लाभार्थी महिलाएं अस्पताल और संबंधित विभाग के चक्कर काट रही हैं। आशा कार्यकर्ताओं से भी लगातार पूछा जा रहा है कि भुगतान कब तक आएगा, लेकिन उनसे भी जानकारी नहीं मिल पा रही है। विभाग के अधिकारी पोर्टल परिवर्तन को देरी की वजह बता रहे हैं।
मातृ स्वास्थ्य सुधार के उद्देश्य से संचालित जननी सुरक्षा योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र की प्रसूताओं को 1400 रुपये और शहरी क्षेत्र की प्रसूताओं को 1000 रुपये दिए जाते हैं। यह धनराशि प्रसव के बाद पोषण, दवाओं और आवश्यक जरूरतों के लिए दी जाती है। लाभ के लिए प्रसव सरकारी या मान्यता प्राप्त अस्पताल में होना जरूरी है।
योजना के तहत प्रसूताओं को छह महीने से भुगतान नहीं मिल रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पहले भुगतान पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) के माध्यम से किया जाता था। अब सिंगल नोडल अकाउंट (एसएनए) स्पर्श पोर्टल से भुगतान प्रक्रिया शुरू की गई है। पोर्टल परिवर्तन के कारण कुछ तकनीकी समस्याएं आई हैं। इस वजह से देरी हो रही है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक 9636 प्रसव हुए हैं। इनमें करीब चार हजार लाभार्थियों को भुगतान हो चुका है। लगभग पांच हजार प्रसूताओं के भुगतान की प्रक्रिया जारी है। कर्मचारियों का कहना है कि कुछ मामलों में अधूरे दस्तावेजों के कारण भी भुगतान अटका है।
शिकायतें और लाभार्थियों की व्यथा
शहर के बलदाऊ चौक निवासी प्रेरणा का प्रसव 29 मार्च को जिला अस्पताल में हुआ था। उनका कहना है कि सभी आवश्यक कागजात जमा कर दिए, लेकिन आज तक उन्हें जननी सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिला है।
शहर के भरत चौक निवासी प्रियंका का प्रसव 10 मई को जिला महिला अस्पताल में हुआ था। उन्होंने बताया कि कई बार पूछने के बावजूद उन्हें योजना की धनराशि नहीं मिली। सिर्फ जल्द भुगतान आएगा कहकर टाल दिया जाता है।
केस-3
उरगांव निवासी प्रियंका ने बताया कि उनका प्रसव 6 जून को जिला महिला अस्पताल में हुआ था। उन्होंने बताया कि पूरे दस्तावेज जमा कर दिए थे। आज तक उनके खाते में योजना का पैसा नहीं आया है।
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वर्ज़न
पोर्टल में बदलाव के कारण भुगतान में देरी हुई है। अब नए पोर्टल के माध्यम से भुगतान किया जा रहा है। जल्द ही सभी लाभार्थियों के खातों में निर्धारित धनराशि भेज दी जाएगी।
— डॉ. ए.पी. वर्मा, नोडल अधिकारी एवं एसीएमओ