मां शारदा मंदिर का विहंगम दृश्य
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बैरागढ़ स्थित मां शारदा शक्तिपीठ में दूर-दूर से लोग दर्शन करने आते हैं। मान्यता है कि यहां मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है। कहते हैं कि चंदेलकालीन वीर योद्धा आल्हा को अमरत्व का वरदान भी मां शारदा ने ही दिया था। मंदिर का निर्माण भी आल्हा द्वारा ही करवाया जाना बताया जाता है। इसी स्थान पर चौहानों के साथ आल्हा के अंतिम युद्ध के कारण
इसका नाम बैरागढ़ पड़ा है। शक्तिपीठ बैरागढ़ बुंदेलखंड क्षेत्र के जनपद जालौन की तहसील उरई में कोंच तहसील की सीमा पर है। यहां वाया एट होकर या फिर उरई-कोंच मुख्य मार्ग पर स्थित हरदोई से आठ किमी दक्षिण का रास्ता तय कर पहुंचा जा सकता है। झांसी-कानपुर रेल ट्रैक पर एट जंक्शन से सात किमी उत्तर में यह धार्मिक स्थल है। निर्जन स्थान पर स्थित
मां शारदे का भव्य मंदिर वर्षों से आस्था का केंद्र रहा है। गर्भगृह में लाल पत्थर पर उत्कीर्ण मां शारदा की अष्टभुजी प्रतिमा अभय प्रदान करने वाली है। आल्हा ने अपनी आराध्या को चालीस मन वजनी सांग अर्पित की थी जो आज भी मंदिर के शिखर के पार्श्व में देखी जा सकती है। चूंकि वीर आल्हा ने अपने बैरियों के साथ यहां अंतिम युद्ध लड़ा था, इसलिए इसका
नाम बैरागढ़ पड़ा। मुख्य मंदिर के ठीक पीछे दक्षिण में भवन से सटा एक अलौकिक जलकुंड है। मान्यता है कि इसमें स्नान करने से किसी भी प्रकार का चर्मरोग ठीक हो जाता है। शारदीय एवं चैत्र नवरात्र में यहां विशाल मेला लगता है।