जालौन। फर्जी आधार कार्ड लगाकर सरकारी खाद्यान्न विक्रेताओं द्वारा राशन में हेराफेरी किए जाने का मामले में डीएम के आदेश पर वर्ष 2018 में 11 कोटेदारों व तीन संविदा कर्मचारियों के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच कर रही थी। जांच में घोटाले के तार तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक कमलसिंह कुशवाहा से भी जुड़े पाए गए। इसके बाद शुक्रवार को क्राइम ब्रांच व कोतवाली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया।
वर्ष 2018 में शासन स्तर से गठित टीम की जांच में खुलासा हुआ था कि नगर के कुछ खाद्यान्न विक्रेता पूर्ति कार्यालय में तैनात संविदा कर्मचारियों की मिलीभगत से ई-पॉस मशीनों के माध्यम से फर्जी आधार कार्ड लगाकर सरकारी खाद्यान्न व केरोसीन के वितरण में घपलेबाजी कर रहे थे। इस मामले का संज्ञान लेते हुए तत्कालीन डीएम डॉ. मन्नान अख्तर ने 11 कोटेदारों व पूर्ति कार्यालय में तैनात तीन संविदा कर्मचारियों के खिलाफ तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक अजीत कुमार को कोतवाली में मुकदमा पंजीकृत कराने के निर्देश दिए थे।
डीएम के निर्देश पर तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक ने कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले की जांच क्राइम ब्रांच की टीम कर रही थी। क्राइम ब्रांच की जांच में खुलासा हुआ कि घोटाले को अंजाम देने के लिए तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक कमल सिंह कुशवाहा (वर्तमान में पूर्ति कार्यालय माधौगढ़ में तैनात) की आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने उन्हें भी मामले में आरोपी बनाया गया।
आरोपी बनाए जाने के बाद क्राइम ब्रांच प्रभारी निगवेंद्र सिंह को सूचना मिली कि मामले में आरोपी कमल सिंह कुशवाहा औरैया रोड पर स्थित एक चाय की दुकान पर मौजूद हैं। सूचना मिलते ही क्राइंच ब्रांच की टीम व कोतवाली पुलिस की टीम ने आरोपी पूर्ति निरीक्षक कमल सिंह कुशवाहा को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है।
क्राइम ब्रांच प्रभारी ने बताया कि खाद्यान्न घोटाले में तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक कमल सिंह कुशवाहा की भी संलिप्तता पाई गई थी। जिसके बाद उन्हें भी घोटाले में आरोपी बनाया गया था। उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है। वहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी कंधर्पेस द्विवेदी ने बताया कि आरोपी को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। वहीं, उसके ऊपर 12 मामले पहले से दर्ज हैं।
इस तरह किया गया था घोटाला
खाद्यान्न वितरण में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से नगर के कोटेदारों को वर्ष 2017 में ई-पॉस मशीनों का वितरण कराया गया था। ई-पॉस मशीनों में फीड आधार कार्ड के माध्यम से खाद्यान्न एवं केरोसीन का वितरण कराया जा रहा था। लेकिन कोटेदारों ने पूर्ति कार्यालय में तैनात संविदा कर्मचारियों से सांठगांठ कर ली। यह सभी लोग मिलकर यूनिटों में प्रदर्शित आधार संख्या को एडिट कराकर दूसरे आधार कार्ड को अनधिकृत तरीके से फीड करा लेते थे। इसके बाद ई-पॉस मशीन से अधार ऑथेंटिकेशन की ट्रांजेक्शन प्रक्रिया की जाती थी। इस प्रकार कार्ड धारक को आवंटित खाद्यान्न का आहरण कर लिया जाता था। खाद्यान्न आहरण के बाद लाभार्थी की आधार संख्या को पुनः जोड़ दिया जाता था। उस समय आठ आधार कार्ड के माध्यम से तकरीबन एक हजार यूनिट का खाद्यान्न फर्जी तरीके से आहरण किया गया था। इस फर्जीवाड़े से विभाग को लाखों रुपये का चूना लगाया गया।