आंधी के साथ फटी जमीन का दृश्य।
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कदौरा में गुरुवार की देर रात बारिश व आंधी के दौरान थाने के पास करीब 15 फीट सड़क फट गई। सुबह जब लोगों ने जमीन फटी देखी तो वहां दहशत फैल गई। भू-वैज्ञानिकाें का मामना है कि अवैध खनन के चलते ही जमीन का भौगोलिक संतुलन बिगड़ जाता है और जमीन की प्लेट्स खिसकने के कारण ऐसा होता है। गुरुवार की रात कदौरा कस्बा में बारिश के
दौरान करीब 15 फीट तक जमीन फट गई। थाने में तैनात रसोईया संजीव ने सुबह जब जमीन फटी देखी तो उसने अन्य लोगाें को दिखाया। इससे आसपास के लोग घबरा गए। वहां लोगों की भीड़ लग गई। लोग यह सोच रहे थे कि कहीं भूकंप तो नहीं आया था लेकिन भू-वैज्ञानिक डाक्टर रमणीक श्रीवास्तव का कहना है कि यह प्रकृति से छेड़छाड़ का नतीजा है। उनका
कहना है कि यह आम बात है इससे पहले भी वर्ष 2007 में कालपी में भी जमीन फटी थी उस दौरान कई मकान भी चपेट में आ गए थे। इसकी सर्वे टीम भी बाहर से आई थी, जांच के बाद यह पता चला कि जमीन के नीचे की प्लेट्स खिसकने के कारण दरार आ जाती है। यह नदियाें के आसपास के इलाकों में होता है। उन्हाेंने बताया कि इसका कारण नदियाें से
पोकलैंड द्वारा अवैध खनन भी होता है। खनन के कारण जमीन नीचे से पोला हो जाती है। इसके बाद ये उस जगह को भरने के लिए स्वत: समायोजित होती है जिसके परिणाम स्वरूप जमीन फटने जैसी घटना सामने आती है।