का बजट खर्च हो गया लेकिन रिबोर हुए हैंडपंपों का पता किसी को नहीं है। जल निगम विभाग से वर्ष 2015-16 में रिबोर किए गए हैंडपंपों का सत्यापन किया जाना है। इसके लिए जिला प्रशासन ने कई बार सूची भी मांगी लेकिन विभागीय अफसर टालमटोल का रवैया अपना रहे हैं। उधर, अधिकारी भी कोई सख्त कदम नहीं उठा रहे। इससे हैंडपंप रिबोर करने में घालमेल
की गंध भी आ रही है। वर्ष 2015-16 में शासन ने 508.91 लाख रुपये का बजट खराब पड़े हैंडपंपों को रिबोर करने के लिए दिया था। बजट को जल निगम विभाग के खाते में हस्तांतरित कर दिया गया। तब जिला प्रशासन ने जिले के सभी नौ ब्लाकों में 766 स्थायी रूप से खराब हैंडपंपों को रिबोर करने का आदेश कर दिया था। जल निगम के अधिकारियों ने वर्क आडर भी
ले लिया। इसके बाद काम पूरा दिखाकर भुगतान भी ले लिया गया। तत्कालीन जिलाधिकारी रामगणेश को जब शक हुआ तो उन्होंने रिबोर कराए गए हैंडपंपों का सत्यापन कराने के लिए विभागीय अधिकारियों से सूची मांगी। इसके बाद से कई बार पत्र जारी कर सूची मांगी गई लेकिन जल निगम के अधिकारियों ने कान नहीं दिए। अब तक रिबोर कराए गए हैंडपंपों की
जानकारी नहीं मिली है। उधर, जिलाधिकारी संदीप कौर के निर्देश पर डीडीओ आरएस गौतम ने एक बार फिर से इन हैंडपंपों की सूची तलब की है। इससे विभाग के लोगों में हड़कंप मचा हुआ है। इससे गड़बड़ी की आशंका भी बढ़ रही है।
अधिकारियों की चुप्पी समझ से परे
हैंडपंप रिबोर मामले में जल निगम विभाग के अधिकारियों की लापरवाही पर अधिकारियों की चुप्पी भी समझ में नहीं आ रही है। जिला प्रशासन स्तर से लगातार सूची मांगे जाने के बाद उपलब्ध न कराए जाने पर अब तक कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई। अंतिम नोटिस भी जारी नहीं किया गया। इस मामले को तत्कालीन जिलाधिकारी ने भी संज्ञान में लिया। इसके बाद पत्राचार का दौर शुरू हुआ जो अब तक जारी है। हाल में ही जिला विकास अधिकारी आरएस गौतम ने भी पत्र लिखकर सूची उपलब्ध कराने का आदेश किया है।
यह मामला हमारे समय का नहीं है, सूची मांगे जाने का पत्र मिला है। इस पर सूची तैयार कराई जा रही है। जल्द ही जिला प्रशासन को सूची सौंप दी जाएगी।- सुखलाल, अधिशासी अभियंता जल निगम जालौन