विकास की बाट जोह रहा सिमिरिया गांव मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है। हालात ये हैं कि कच्चे रास्ते और ध्वस्त सफाई गांव की पहचान बन गई है। इतना ही नहीं गांव में शिक्षा के भी कोई बेहतर बंदोबस्त नहीं हैं। जूनियर के बाद आगे की पढ़ाई करने के लिए इंटर कालेज नहीं है। इससेे विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए मुख्यालय की शरण लेनी पड़ती है। बीहड़ का
इलाका होने से गांव में शादी विवाह की समस्या भी आडे़ आ रही है। बेटे, बेटियों की शादी के लिए गांव में रिश्ते तो आते हैं, लेकिन कच्चे रास्ते देखकर बनने से पहले ही टूट जाते हैं। अब
चुनावी बेला आई तो नेताओं ने मतदाताओं के यहां पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। ग्रामीणों की मानें तो कसौटी पर खरा उतरने वालों को ही वोट देंगे। गांव की बदहाल सूरत पर पड़ताल करती एक रिपोर्ट।
प्यास बुझाने के लिए कुआं व हैंडपंप ही सहारा
सिमिरिया में पेयजल के लिए भी कोई खास प्रबंध नहीं हैं। ट्यूबवेल व टंकी न होने से यहां के बाशिंदे खुले कुओं और हैंडपंपों एवं नदी के पानी के सहारे हैं। ग्रामीण शिव सिंह, कालका प्रसाद, शिवनंदन आदि का कहना है कि ये काफी समय से यह समस्या है, लेकिन किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। अब चुनाव आ गया है तो नेता तरह तरह के वायदे कर रहे हैं, लेकिन वे उसे को वोट देेंगे, जो उनकी समस्याएं दूर कराएंगे की पहल करेगा।
बेटे, बेटियों की शादी में बाधक बना रास्ता
सिमिरिया गांव जाने के लिए कच्ची सड़क अब गांव में बेटे, बेटियों की शादी मेें बाधा बन रही है। सालों से खराब सड़क के दिन नहीं बहुर सके हैं। ग्रामीण सरोज, देवीदीन, बालकृष्ण, मुरारी, बालादीन आदि की मानें तो रिश्ता तय करने के लिए देखने वाले (रिश्तेदार) तो आते हैं, लेकिन गांव का रास्ता देखकर उनका मोड़ खराब हो जाता है। अधिकांश इसी वजह से बनते बनते टूट गए। इससे परिजनों को बेटे, बेटियोें के ब्याह की चिंता सताने लगी है।