उरई। खरीद केंद्रों पर भी लॉकडाउन का खासा असर दिखाई दिया। पहले दिन बुधवार को जिले के 75 में से सिर्फ छह केंद्रों पर ही किसान गेहूं बेचने पहुंचे। इससे जिले में कुल 250 क्विंटल की खरीद हो सकी। अन्य केंद्रों पर सन्नाटा पसरा नजर आया। अधिकारियों ने पहले दिन खरीद केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को परखा और दिशा-निर्देश दिए।
गेहूं खरीद के लिए जिले में फिलहाल 75 केंद्रों बनाए गए हैं, जिन पर बुधवार को खरीद शुरू की गई। पहले दिन जिले के उरई, एट, कदौरा, कालपी व जालौन सहित सभी सेंटरों में सन्नाटा पसरा नजर आया। पहले दिन सिर्फ कुछ केंद्रों पर खरीद शुरू हुई। विपणन अधिकारी विकास तिवारी व पीसीएफ अधिकारी सौरभ कुमार ने तहसील के केंद्रों के साथ जिला मुख्यालय के मंडी परिसर में बने खरीद केन्द्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने गेहूं बेचने आए किसानों व खरीद केंद्र में लगे मजदूरों को मास्क का वितरण किया।
विपणन अधिकारी ने सभी केंद्र प्रभारियों को चेतावनी दी, कि नियमानुसार खरीद की जाए। निर्देश दिए कि केंद्रों के बाहर साबुन व सैनिटाइजर की व्यवस्था के साथ पीने के पानी के भी इंतजाम किए जाए। चेतावनी भी दी कि शिकायत मिलने पर जिम्मेदार केंद्र प्रभारी के खिलाफ एफआईआर कराई जाएगी।
संवाद न्यूज एजेंसी कोंच के अनुसार, गेहूं की सरकारी खरीद बुधवार से प्रारंभ जरूर हो गई है लेकिन आधी अधूरी तैयारियों के कारण केवल एक ही केंद्रों पर खरीद की जा सकी, जबकि नगरीय क्षेत्र में ही सात क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। मंडी में स्थापित केंद्रों के प्रभारी राजीव सिंह ने बताया कि दो किसानों अतुल पटेल चमरसेना तथा अखिलेश कुमार भदारी का 82 क्विंटल गेहूं खरीदा गया। पहले दिन दो टोकन ही लगे थे।
पीसीएफ केंद्रों प्रभारी अवध लाल कुशवाहा ने बताया कि उनके यहां मार्का नहीं होने के कारण खरीद शुरू नहीं हो सकी। सहकारी क्रय विक्रय समिति केंद्र के प्रभारी रामराजा निरंजन व एलएसएस जुझारपुरा के प्रभारी राजेश शुक्ला ने मार्का और स्टेशनरी नहीं होने की बात कही। एसडीएम ने क्रय केंद्रों का निरीक्षण करने के बाद बताया कि एक हेक्टेयर में अधिकतम 38 क्विंटल मात्रा का ही निर्धारण किया गया है। केंद्रों में थोड़ी बहुत कमियां हैं, जिन्हें जल्दी ही दूर कर लिया जाएगा ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में कोई दिक्कत न हो।