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सिमट गई नदियों की धारा, पशु-पक्षी भी बेहाल

Sun, 24 Apr 2016 11:05 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
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जैसारी खुर्द का खराब पड़ा हैंडपंप। - फोटो : अमर उजाला
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गर्मी का मौसम चरम पर है और पेयजल संकट से लोग त्राहि-त्राहि करने लगे हैं। जालौन जिले में बेतवा नदी बहती है। इसके बावजूद यहां के बाशिंदों को पानी के लिए कोसों दूर तक भटकना पड़ रहा है। अप्रैल में भूजल स्तर गिरने से जल संकट गहराने लगा। तालाबों में धूल उड़ती नजर आ रही हैं, नहरें सूखी पड़ीं हैं, नदियों की जलधारा भी सिमट गई है। आम
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जनमानस से लेकर पशु-पक्षियों को भी पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। यहां तक कि प्यास से जानवर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। वहीं डीएम के आदेश के बावजूद अब तक तालाबों को भरने का काम शुरू नहीं हो सका है। इससे आम लोग खासे परेशान हैं। बता दें कि जनपद जालौन और हमीरपुर के बीच में बहने वाली बेतवा नदी के पानी के उफान को देखकर बच्चे

किसी समय डर जाया करते थे। बड़े भी गहराई में जाने से डरते थे। बहाव में डूबने का डर बना रहता था। लेकिन इन दिनों नदी के घटते जलस्तर से घुटने भर पानी रह गया है। मझधार में भी पानी कम से ऊपर नहीं है। लोग आसानी से पैदल इसे पार कर लेते हैं। पानी का बड़ा प्राकृतिक स्रोत लगभग सूखने की स्थिति में है।
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कागजों में साफ, हकीकत में हाफ
विकास खंड डकोर की एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्लाक के 76 ग्राम पंचायतों में 4268 हैंडपंप लगे हुए हैं। इसमें 205 हैंडपंपों को रिबोर होना बताया गया है। गांवों में अगर जा कर हकीकत देखें अधिकतर हैंडपंप जल स्तर नीचे चले जाने से बंद पड़े हैं। ब्लॉक में तालाब 283 हैं जिनमें कागजों में 222 सूखे पड़े हैं। हकीकत में लगभग एक दर्जन ही तालाबों में पानी है और वह भी

नाममात्र को। डकोर क्षेत्र में ट्यूबवेलों की संख्या 77 हैं जिनमें आधा दर्जन सरकारी कागजों में खराब हैं। इसमें भी बिजली और जलस्तर आदि के चलते करीब 50 ट्यूबवेल खराब हैं। इसी तरह कुओं की संख्या लगभग 600 है। इसमें अधिकतर कुओं की सालों से मरम्मत न होने से ये अपना अस्तित्व खो चुके हैं। वहीं ग्राम गोरन और जैसारी खुर्द में स्थापित पानी की टंकी अभी तक चालू नहीं है।

प्यास से दम तोड़ रहे मवेशी
सूखे के चलते जानवर भी बेहाल हैं जो कभी साफ सुथरे पानी में विचरण करते हुए प्यास बुझाया करते थे। अब तो नदियों से लेकर नहरें, तालाब, पोखर सब सूखे पड़े हैं। कहीं-कहीं नहरों में बने गड्ढों में थोड़ा पानी दिखते ही दर्जनों मवेशी इसमें कूद पड़ते हैं और कई तो गड्ढों में भरा गंदा कीचड़ युक्त पानी पी रहे हैं। खराब पानी पीने से जानवर दम भी तोड़ रहे हैं। ग्रामीणों बालचंद्र, मदन सिंह, बीर सिंह, अरविंद, शिवकुमार, मोहित आदि का कहना है कि ऐसा सूखा कभी नहीं देखा। आंखों के सामने पानी की कमी से जानवरों को प्मरते देखा है।

वर्जन
सूखे के चलते क्षेत्र में पानी की समस्या है। अधीनस्थों को निर्देशित किया गया है गांव-गांव जाकर तालाबों, कुओं, हैंडपंपों का स्थलीय निरीक्षण करें और सही रिपोर्ट दें। ताकि समय रहते लोगों को पानी की समस्या से निजात मिल सके। अधिकतर गांवों में हैंडपंप दुरस्त कराए जा रहे हैं। इसके लिए सामान गांवों में पहुंचाया जा रहा है।
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                                          आलोक पांडेय, खंड विकास अधिकारी, डकोर
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