उरई। ईस्टन रेलवे कोलकाता के प्रमुख मुख्य संरक्षा अधिकारी (पीसीएसओ) रामबहादुर राय की अगुवाई में पड़ताल की गई।
इस दौरान सेफ्टी ऑडिट करने पहुंची अधिकारियों की आठ सदस्यीय टीम को निर्माण कार्य में सेफ्टी के मानक नजर नहीं आए। इस पर उन्होंने स्थानीय अधिकारियों पर नाराजगी जताई।
झांसी-कानपुर रेलमार्ग का सेफ्टी ऑडिट किया गया। टीम ने रेलमार्ग के पुल, रेलवे क्रॉसिंग आदि की बारीकी से जांच की। उरई रेलवे स्टेशन पर दो घंटे तक रुककर कई बिंदुओं पर पड़ताल की। टीम ने झांसी-कानपुर रेलमार्ग से गुजरने वाली पनवेल एक्सप्रेस समेत तीन ट्रेनों के इंजन में लगी फॉग डिवाइस भी जांची।
टीम ने सबसे पहले अप और डाउन लाइन की ट्रेनों के आवागमन की सिग्नल प्रणाली और प्वाइंट को बारीकी से देखा। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात डिप्टी एसएस केसी सोनी से ट्रेनों के आवागमन के दौरान अपनाई जा रही प्रक्रिया को भी समझा। ओएचई की लंबाई की भी जांच की। स्थानीय अधिकारियों से पब्लिक की सेफ्टी को लेकर अपनाई जा रहीं व्यवस्था के बारे में पूछा। इसके अलावा अभिलेख भी देखे। सिग्नल फेल के आंकड़े चेक किए।
कालपी यमुना पुल और रेलवे ट्रैक के कर्व की जांच की। निर्माण कार्य के दौरान लाल पट्टी व सेफ्टी मानकों के तहत लोगों को उस जगह से आने से रोकने के जो सांकेतिक इंतजाम होते हैं, वह नहीं दिखे। मुख्य सिग्नल अभियंता केसी बैरवा, मुख्य अभियंता परिचालन अमित मित्तल, डिप्टी सीएसओ कुमुद कुमार, गौतम भट्टाचार्य, डिप्टी सीओएम एके मौर्या, मुख्य अभियंता जेपी वर्मा टीम में शामिल थे।
झांसी मंडल के एडीआरएम आरडी मौर्या ने बताया कि यह निरीक्षण तीन साल में एक बार होता है। हर सेक्शन में सालाना निरीक्षण होता है। इस निरीक्षण में दूसरे जोनल रेलवे के अधिकारी आकर सेफ्टी की जांच करते हैं। जो कमियां मिलती हैं, उसकी रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को देते हैं। साथ ही इस मंडल की जो अच्छाइयां होती हैं, उसे दूसरे मंडल में लागू करने पर विचार किया जाता है। इस दौरान झांसी मंडल के सीनियर डीएसओ अतुल यादव, सीनियर डीओएम जे संजय कुमार, सीनियर डीएसटीई नेहा गौतम, सीनियर डीईएन कपिल गोयल, स्टेशन अधीक्षक एसके खरे आदि रहे।