500 व 1000 रुपये के नोटों के बंद होने से मची आपाधापी के बाद बैंकों की अव्यवस्था अब जानलेवा हो चली है। बेटी की शादी के लिए दस हजार रुपये निकालने की खातिर रविवार को बैंक की लंबी लाइन में फंसा रिटायर्ड टीचर सबसे गिड़गिड़ाता रहा, बैंक अधिकारियों से भी मिन्नतें कीं, पर किसी ने तवज्जो नहीं दी। रुपयों के अभाव में बेटी की शादी लटकती देख उसे
दिल का दौरा पड़ गया। लोगों ने अस्पताल पहुंचाया, जहां उसकी सांसें थम गईं। माधौगढ़ कस्बे के अंबेडकरनगर के रहने वाले 70 वर्षीय रघुनाथ वर्मा की बेटी की शादी 16 नवंबर को होनी है। 15 नवंबर को उन्हें तिलक लेकर बेटी की होने वाली ससुराल भिंड जाना था। पांच सौ व हजार के पुराने नोट बंद होने से घर में रखा पैसा बेकार हो चुका था। ऐसे में रघुनाथ दस
हजार रुपये निकालने के लिए रविवार को घर के नजदीकी स्टेट बैंक की शाखा पहुंच गए। यहां करीब एक हजार लोगाें की लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। इस बीच कोई बैंक अधिकारी बाहर आता तो उससे गिड़गिड़ाते, अपनी उम्र और बेटी की शादी का वास्ता देते, पर न तो बैंक अधिकारी उनकी कुछ सुनता और न ही लाइन में लगे लोग।
बेटी की शादी टलते देख उन्हें दिल का दौरा पड़ा और वे वहीं गिर पड़े। वहां खड़े लोगों ने उन्हें उठाकर माधौगढ़ सीएचसी पहुंचाया और परिजनों को सूचना दी। इस दौरान उनकी हालत बिगड़ती गई। वे बार बार ‘बेटी की शादी कैसे होगी, उसके हाथ कैसे पीले होंगे’ की रट लगाए थे। लोगों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, इसी दौरान उनकी सांस थम गई। रघुनाथ वर्मा की
मौत के बाद अस्पताल पहुंचे परिजनों में कोहराम मच गया। परिजनाें को अब चिंता सता रही है कि बेटी के हाथ कैसे पीले होंगे। उनका कहना है कि जमा रुपये निकालने की व्यवस्था बदलनी चाहिए।