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प्रशासन के दबाव में 15 एंबुलेंस की गाडिय़ा की छोड़ी, आंदोलन रहा जारी

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देर रात जिला अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर एकत्र एंबुलेंस चालक - फोटो : ORAI
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उरई। प्रशासन से बातचीत के बाद नौ ब्लाक और पांच तहसीलों पर एक-एक एंबुलेंस को खड़ा कर दिया गया है। बावजूद इसके मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। वहीं कर्मचारियों का प्रदर्शन भी जारी रहा। बुधवार को कर्मचारियों ने जीआईसी स्कूल के मैदान में अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। वहीं, देर शाम जिला प्रशासन ने सख्ती से साथ सभी एंबुलेंस की गाड़ियों को छोड़ कर्मचारियों पर दबाव बनाया। जिसको लेकर प्रशासन व कर्मचारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। एंबुलेंस चालकों का आरोप है कि देर रात पुलिस प्रशासन ने उनसे जबरन गाड़ियों की चाभियां छीन ली। इसके बाद जमीन पर लाठियां पटकते हुए खदेड़ दिया। एंबुलेंस चालकों की बड़ी संख्या जिला अस्पताल के इमरजेंसी में पहुंचीं। जहां पर धक्कामुक्की में मामूली रूप से चुटहिल हुए चालकों को इलाज किया गया।
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कालपी मार्ग से हटकर एंबुलेंस कर्मियों का धरना प्रदर्शन जीआईसी के पास संचालित रहा। जिले के एंबुलेंस कर्मी विभिन्न मांगों को लेकर लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार को भी कर्मचारी हड़ताल पर रहे। पुलिस ने धरना स्थल से उनकी गाड़ियां भी हटवा दी थी। कर्मचारियों ने हुंकार भरते हुए एलान किया कि जब तक मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा तब तक आंदोलन जारी रखेंगे। धरना प्रदर्शन को संबोधित कर रहे जिला अध्यक्ष राजवीर सिंह ने कहा कि समस्याओं को शासन स्तर पर अवगत कराने के बाद भी मांगें पूरी नहीं की जा रही हैं। मांगों को पूरा न किया गया तो हड़ताल जारी रखेंगे। जिला अस्पताल के हेल्प डेस्क अंजू वर्मा ने कहा कि प्रशासन हम लोगों पर दबाव बनाया जा रहा है। जिससे अब हम लोग प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। अब 25 हजार कर्मियों की नौकरी संकट में है। एंबुलेंस चालकों की हड़ताल के कारण सारा दिन मरीजों की जान सांसत में रही। वहीं देर शाम एसडीएम सत्येंद्र सिंह कोतवाली पुलिस के साथ मौके पर पहुंच गए। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने आंदोलनकारियों की तीखी नोकझोंक हुई। इस दौरान रोहित कुमार, धीर सिंह, रोहित शाक्य, मनीष कुमार आदि मौजूद रहें।
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