फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अधिकारियों के ना पहुंचने से किसानों में आक्रोश

विज्ञापन
बड़ा गांव में अधिकारी न आने से नारेबाजी करते किसान - फोटो : ORAI
विज्ञापन
कदौरा। ब्लाक क्षेत्र के ग्राम बड़ागांव में अन्ना मवेशियों द्वारा 133 बीघा फसल बर्बाद किए जाने की शिकायत के बावजूद भी रविवार को कोई भी प्रशासनिक अधिकारी गांव नहीं पहुंचा तो आक्रोशित किसानों में नारेबाजी कर आरोप लगाया कि प्रशासन किसानों की समस्या पर गंभीर नहीं है, जिससे आए दिन अन्ना मवेशी फसलों को रौंद रहे है और किसान बर्बादी की कगार पहुंच गए हैं।
विज्ञापन

शनिवार सुबह बड़ा गांव के दो दर्जन किसानों की 133 बीघा फसल को अन्ना जानवरों ने रौंद दिया था जिस पर किसानों ने नष्ट फसलों को ले जाकर थाना परिसर में नायब तहसीलदार व प्रभारी निरीक्षक को दिखाते हुए मुआवजे की मांग कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की थी। जिस पर अधिकारियों ने आश्वासन दिया गया था कि जल्द प्रशासनिक टीम मौके पर भेजकर निरीक्षण कराया जाएगा, लेकिन दो दिन बाद बीतने के बावजूद प्रशासन का कोई भी नुमाइंदा गांव नही पहुंचा, जिससे किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे है।
रविवार को गांव के किसान रवि, रामखिलावन, चंद्रपाल मकबूल, हसन, मूलचंद्र, नुरमुहम्मद, घसीटा, साबिर, भरत सिंह नारायण यादव, उदयभान, मोहर सिंह, अरविंद, शिवकुमार, सोबरन, हरप्रसाद, अमरनाथ व चंद्रभूषण आदि ने प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्यक्त कर नारेबाजी की। आरोप लगाया कि हम लोगों की तो साल भर की मेहनत पर पानी फिर गया है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों के कानों में जू तक नहीं रेंग रही है, जबकि शनिवार को थाना परिसर में समस्या के समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक कोई भी अधिकारी मौके पर निरीक्षण करते नही पहुंचा।
विज्ञापन

गांव के लेखपाल से बात की तो उसने दो दिन बाद आने की बात कहकर टाल दिया। इस संबंध में उपजिलाधिकारी कालपी कौशल कुमार ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है, मौके पर बीडीओ को भेजा जा रहा है। इसके अलावा गोशाला में व्याप्त खामियों को जल्द दूर किया जाएगा और अन्ना जानवर छोड़ने वाले पशुपालकों की सूची बना कर उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
सिर्फ निरीक्षण के दौरान ही बंद किए जाते हैं अन्ना
ब्लाक क्षेत्र में 22 स्थायी व 26 अस्थायी गौशाला है, लेकिन अधिकतर गौशालाओं में मवेशी नाममात्र के हैं और जिन गोशालाओं में मवेशी है भी तो वहां खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं है। जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ निरीक्षण के दौरान फोटो खींचने के लिए ही गोशाला में मवेशियों को रखवा देते है और अधिकारियों के जाते ही स्थिति जस की तस हो जाती है।

खेतों में अन्ना मवेशियों रखवाली करते किसान- फोटो : ORAI

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें