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ढाई साल पूर्व हाईवे से हटाए जा चुके धार्मिक स्थल

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कालपी में प्रशासन द्वारा दूसरे स्थान पर बनवाया गया मंदिर - फोटो : ORAI
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उरई। शासन ने धार्मिक स्थलों को हाईवे व रास्तों से हटाने की मुहिम शुरू की है। इसको लेकर जिला प्रशासन भी सजग है। प्रशासनिक अधिकारियों को अनुसार जिले से ढाई वर्ष पूर्व ही नेशनल और स्टेट हाईवे के रास्ते से पड़ने वाले धार्मिक स्थलों को पुलिस व प्रशासन ने सूझबूझ हटा दिया था। इसमें सबसे ज्यादा परेशानी कालपी में हुई थी। इसके लिए प्रशासन ने कई जनपदों की फोर्स को बुलाया था, तब कहीं जाकर धार्मिक स्थलों का विस्थापन किया जा सका था। अधिकारियों के अनुसार, अब जिले में ऐसा एक भी धार्मिक स्थल नहीं है, जो यातायात में बाधा बन रहा हो।
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बता दें कि करीब एक दशक तक कालपी हाईवे के रास्ते में आने वाले धार्मिक स्थलों के विस्थापन न होने से हाईवे का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा था। इससे कानपुर-झांसी हाईवे पर कालपी में लोगों को घंटो जाम के झाम से जूझना पड़ता था। यहीं हाल उरई-जालौन व जालौन-औरेया मार्ग का भी था। यहां पर दर्जनों धार्मिक स्थलों की वजह से निर्माण कार्य काफी समय तक प्रभावित रहा, लेकिन वित्तीय वर्ष 2018-19 में तत्कालीन जिलाधिकारी डा. मन्नान अख्तर व अपर जिलाधिकारी प्रमिल कुमार सिंह की सूझबूझ के चलते जिला प्रशासन व पुलिस ने शांतिपूर्ण तरीके से दोनों क्षेत्रों में निर्माण कार्य में बांधा बने धार्मिक स्थलों को विस्थापित कराया था।
विस्थापना के बाद जालौन क्षेत्र व कालपी क्षेत्र में हाईवे का निर्माण कार्य शुरू कराया जा सका। कालपी में ओवर ब्रिज का निर्माण कार्य पूरा कराकर यातायात शुरू करा दिया गया है, जिससे यहां के बाशिंदों को जाम से राहत मिली थी। सिटी मजिस्ट्रेट सुनील कुमार शुक्ला ने बताया कि जिला प्रशासन ने लगभग ढाई वर्ष पूर्व ही सभी धार्मिक स्थलों को विस्थापित करा दिया था। अब जिले में हाईवे के रास्ते में एक भी धार्मिक स्थल नहीं है, जिससे लोगों को यातायात में परेशानी हो सके।
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कालपी में दो अलग-अलग धर्मों के धार्मिक स्थल हाईवे के निर्माण में रोड़ा बने थे, जिसको लेकर कई बार प्रशासन व धार्मिक लोग आमने सामने आ चुके थे। स्थिति यह थी कि कई सालों तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी व जनप्रतिनिधि इन धार्मिक स्थलों के विस्थापन को लेकर चर्चा तक नहीं की। जिले वर्ष 2018 के शुरुआती दौर में ही प्रशासन ने इन धार्मिक स्थलों के विस्थापन को लेकर धार्मिक गुरुओं से बातचीत थी और विस्थापन को लेकर माहौल बनाया और 8 सिंबर 2018 को कई जिलों की फोर्स के साथ धार्मिक स्थलों को हटाया गया। जिला प्रशासन ने न सिर्फ इन धार्मिक स्थलों को हटाया, बल्कि सभी हटाए गए धार्मिक स्थलों को अलग जमीन देकर, सरकारी खर्च से धार्मिक स्थलों का निर्माण कराया। जिससे सभी धर्म के लोगों ने प्रशासन की सराहना की थी।
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