तिर्वा। आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवतियों और मासूमों को पोषक आहार वितरित किया जाता है जिसमें चने की दाल के साथ ही दलिया और रिफाइंड होता है। सोमवार को बाल विकास परियोजना कार्यालय में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने खराब दाल लेने से इन्कार कर दिया।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवतियों और मासूमों को दाल, दलिया, रिफाइंड और पंजीरी उपलब्ध कराई जाती है। इसके लिए बाल विकास परियोजना कार्यालय से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को राशन उपलब्ध कराया जाता है। सोमवार को राशन वितरण के दौरान दाल के पैकेट खोले गए तो उनमें से सफेद पाउडर निकल रहा था और बदबू भी आ रही थी। इस पर कार्यकर्ताओं ने सुपरवाइजर को दाल दिखाते हुए सवाल उठाए कि आखिर बच्चों को इस तरह का पोषाहार कैसे दिया जा सकता है।
कर्मचारियों ने सफाई देते हुए कहा कि जैसा राशन आया है वैसा ही दिया जाएगा। नाराज कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह गर्भवतियों और बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है। उन्होंने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि केंद्र पर मनमानी हो रही है और शिकायत करने की बात कहने पर प्रताड़ित किया जाता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने उच्चाधिकारियों से मांग की है कि पूरे राशन की गुणवत्ता की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। डीपीओ राजेश वर्मा ने बताया कि जो खराब दाल को वापस करवाकर सही दाल वितरित करवाई जाएगी।
दाल की वैधता तिथि हो गई समाप्त
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को वितरित की जाने वाली चने की दाल की पैकिंग 24 मार्च को हुई थी। पैकिंग के छह माह तक दाल की वैधता तिथि रहती है और उसके बाद दाल का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। वैधता समाप्त होने के बाद भी दाल वितरित की जा रही है।