कोंच की प्रसिद्ध रामलीला में धनुष भंग की लीला का मंचन किया गया। लीला में दर्शाया गया कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के धनुष तोड़ते ही सीता जी ने राम के गले में जयमाला पहना कर उनका वरण कर लिया। इसके बाद धूमधाम के साथ राम व सीता का ब्याह हुआ।
लीला में दिखाया गया कि जनकपुर के नरेश महाराज जनक सीता स्वयंवर का आयोजन कर घोषणा करते हैं कि जो भी शिव धनुष पिनाक पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा उसी के साथ जनकनंदिनी सीता का विवाह होगा। समूचे विश्व में राजा की यह घोषणा प्रसारित कर दी जाती है।
सीता को वरण करने के लिये देश देशांतर के राजा, भूपाल तो आते ही हैं, देवता, नाग, गंधर्व, किन्नर आदि भी राजाओं के वेश में जनक की रंगशाला में पधारते हैं और धनुष उठाने के प्रयास करते हैं लेकिन वे उसे हिला भी न सके।
जब विश्वामित्र की आज्ञा पाकर राम उसे उठा कर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास करते हैं लेकिन धनुष टूट जाता है। सखियों के संग आकर जानकी सीता ने राम के गले में जयमाला पहना कर उनका वरण कर लिया। उधर, अभिनय विभाग के उपाध्यक्ष मृदुल दांतरे ने बताया कि 14 अक्तूबर को राम वनवास लीला का आयोजन होगा।