रामलला मंदिर में अपनी प्रस्तुति देती हर्षिता त्रिपाठी
- फोटो : अमर उजाला
प्राचीन रामलला मंदिर में आयोजित झूला महोत्सव में रविवार रात कलाकारों की प्रस्तुतियाें से श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। महारानी लक्ष्मीबाई के गुरुद्वारे रामलला मंदिर में पखवाड़े भर चलने वाले सुप्रसिद्घ झूला महोत्सव के तीसरे दिन मंदिर के महंत रघुनाथदास के सानिध्य में शास्त्रीय और सुगम संगीत की अनोखी जुगलबंदी का संगीत प्रेमियों ने भरपूर आनंद लिया।
नरोत्तम स्वर्णकार ने गाया ‘दशा मुझ दीन की भगवान संभालोगे तो क्या होगा..’। कुंतीदेवी तिवारी ने बुंदेली में झूला गाया, ‘दर्शन दे घनश्याम नाथ मेरी अंखियां प्यासी हैं..’। अजमेर सिंह ने ‘हे राजाराम तेरी आरती उतारूं, वाम भाग शोभित जग जननी..’ की शानदार प्रस्तुति दी। गिरिजानंद बेलमां ने मियां मल्हार में गाया, ‘चमकत गई श्याम बीच..’। वीरेंद्र त्रिपाठी
ने झूला गीत गाया, ‘देख कर जनकनंदिनी बाद में बस खड़ी की खड़ी रह गईं..’। धर्मेन्द्र झांसीे ने गाया, ‘झूलत प्यारे राजदुलारे झुमकि झुलावत राज गुजरिया..’। हरिभाई सोनी ने रामधुन सुना कर वाहवाही लूटी। हर्षित त्रिपाठी ने ‘झूल झूलत युगल किशोर..’ की शानदार प्रस्तुतियां दीं। दीक्षा त्रिपाठी ने ‘सांझ सबेरे अधरों पै मेरे..’ की जोरदार प्रस्तुति पर खूब
तालियां बजीं। साहित्यकार नरेंद्र मोहन मित्र, एसपी सिंह, अखिलेश बबेले सहित तमम लोग मैजूद रहे। हारमोनियम पर हरीश याज्ञिक तथा तबले पर मथुराप्रसाद व महेश संगत कर रहे थे। अंत में भगवान रामलला सरकार की आरती की गई और प्रसाद वितरित किया गया।