बिधूना। चार दिन से हो रही बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। खेतों में खड़ी धान की फसल कटने से पहले ही भीगकर जमीन पर बिछ गई है। जबकि आलू और लहसुन की फसल पर भी संकट मंडरा रहा है। किसान अब बुवाई और मड़ाई नहीं कर पा रहे हैं।
बारिश के चलते खेतों में पानी भर गया है। इससे जहां धान की कटाई और मड़ाई रुक गई है। वहीं गेहूं की बुवाई भी लगभग 15 से 20 दिन तक लेट होने की आशंका है। किसानों का कहना है कि पहले धान और बाजरे की कटाई पूरी होनी चाहिए। तभी खेत गेहूं की बुवाई के लिए तैयार हो पाएंगे। यदि बारिश और कुछ दिन जारी रही, तो नवंबर की शुरुआत में होने वाली बुवाई अब मध्य नवंबर तक खिसक सकती है। आलू की फसल पर भी बुरा असर पड़ा है। जिन किसानों ने बुवाई कर दी थी, उनके खेतों में पानी भर गया है। इससे मिट्टी में दबा आलू सड़ने का खतरा बढ़ गया है। मंडी में भी व्यापारी धान को तिरपाल और पॉलिथीन से ढककर बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
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गांव शाहूपुर निवासी किसान सुरेंद्र पाल ने बताया कि इस बार किसान दोहरी मार झेल रहे हैं। धान की फसल की कटाई नहीं हो पा रही है और आलू की फसल पानी में डूब रही है।
भौराजपुर निवासी बृजेश शाक्य ने बताया कि लहसुन की फसल में भी भारी नुकसान हुआ है। बारिश के कारण खेतों में खरपतवार बढ़ गया है। इससे फसल कमजोर पड़ गई है और अब अतिरिक्त मजदूर लगाकर निराई-गुड़ाई करानी पड़ेगी।