25 दिसंबर को प्रकाशित खबर का पीडीएफ
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उरई (जालौन)। पुलिया की लंबाई में गड़बड़झाला दिखाकर एनएचएआई से किए गए फर्जीबाड़े के मामले में अब कार्रवाई की आशंका से पीडब्ल्यूडी विभाग में हड़कंप की स्थिति है। अधिकारियों व बाबुओं का कहना है कि ठेकेदार की कंपनी तो काली सूची में जाएगी पर 18 की जगह 21 मीटर का प्रमाण पत्र बनाने वाले विभागीय कर्मी भी नहीं बचेेंगे। सूत्रों के अनुसार जल्द ही जांच पड़ताल के लिए झांसी से पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की कोई टीम भी जिले में आ सकती है। अधिशासी अभियंता वीके राय का कहना है कि यदि टीम आएगी तो जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा।
बता दें कि जिले में सपा शासन के वर्ष 2013 में मेसर्स कृष्णा कंस्ट्रक्शन मेरठ की कंपनी ने हमीरपुर-कालपी राजमार्ग 91 का लगभग 45 किलोमीटर का निर्माण कार्य कराया था। निर्माण के दौरान कंपनी ने जोल्हूपुर क्रासिंग के पास नाले पर करीब 18.25 मीटर पुलिया का निर्माण कराया था। कंपनी के ठेकेदार ने एनएचआई में टेंडर हासिल करने के लिए जिले के अधिकारियों से सांठगांठ कर 18.25 मीटर की पुलिया को 21 मीटर का बड़ा पुल बताकर अनुभव प्रमाण पत्र जारी करा लिया।
जिससे आधार पर कंपनी ने एनएचआई से करोड़ों के ठेके लिए है। मामले के तूल पकड़ने के बाद अब कंपनी पर कार्रवाई का डंडा चलना लगभग तय है। फिलहाल अधिकारी उच्च अधिकारियों के निर्देश का इंतजार कर रहे हैं। पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता वीके राय का कहना है कि मामलेे को लेकर अपनी जांच रिपोर्ट एनएचएआई व मंडलीय अधिकारियों को पहले ही सौंप दी है। अब जो भी कार्रवाई होनी होगी, वह शासन के निर्देशानुसार ही होगी। यदि कभी कोई टीम आती है तो विभाग उसके साथ पूरा सहयोग करेगा।
नजदीकी जनपदों तक होगी जांच
विभागीय सूत्रों की मानें तो कंपनी के इस फर्जीबाड़े के उजागर होने के बाद कंपनी के जिले अथवा बुंदेलखंड के अन्य जिलों में कराए गए कार्य भी संदेह के दायरे में आ गए हैं। हो सकता है कि जल्द ही कृष्णा कंस्ट्रक्शन का नाम किसी और फर्जीबाड़े में भी प्रकाश में आ जाए। सूत्रों की मानें तो हमीरपुर-कालपी की पुलिया में गड़बड़ी करने वाली कृष्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी ने एनएचएआई से बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे में भी कुछ काम पेटी कांट्रेक्ट पर ले रखे हैं, वे भी कंपनी से छीने जा सकते हैं।