एक माह से लगातार विवादों में घिरे आईटीआई प्रिंसिपल की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। मंगलवार को फिर से आईटीआई के छात्र, छात्राएं प्रिंसिपल की मनमानी की शिकायत करने कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां पर उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट को शिकायती पत्र सौंपते हुए बताया कि उन्हें अपरेंटिस नहीं करने दी जा रही है। इस पर सिटी मजिस्ट्रेट ने शहर कोतवाल को आदेश
दिए कि वह पूरे मामले की जांच कर आख्या प्रस्तुत करें। आईटीआई के छात्र, छात्राएं शिखा वर्मा, सुल्ताना बेगम, रागिनी वर्मा, रितु गुर्जर, दीप्ती शर्मा, हिना ताज खान, परमात्मा शरण, प्रभात सोनी, राजबहादुर, योगेश कुमार, राहुल वर्मा, अर्पित कुमार आदि ने मंगलवार को सिटी मजिस्ट्रेट मोइनुल हक को शिकायती पत्र सौंपते हुए बताया कि उनका आईटीआई
का अंतिम सत्र समाप्त हो गया है और अब अपरेंटिस होना है। प्रधानाचार्य एमके सिंह उन्हेें अपरेंटिस नहीं करने दे रहे हैं। आरोप लगाया कि आईटीआई के स्टाफ द्वारा उन्हें कालेज परिसर के अंदर ही नहीं घुसने दिया जाता है। एक अगस्त को जब वह इस बारे में बात करने गए तो प्रधानाचार्य ने अभद्रता कर दी। आरोप लगाया कि प्रधानाचार्य ने उन्हेें धमकी देकर कालेज
से बाहर भी निकलवा दिया। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सिटी मजिस्ट्रेट ने उरई कोतवाल को पूरे मामले की जांच कर आख्या प्रस्तुत करने को कहा है। इस पर पीड़ित छात्र-छात्राओं ने राहत की सांस ली है।
वर्जन
आईटीआई प्रिंसिपल के खिलाफ शिकायत हमारे पास आई थी। इस मामले में उरई कोतवाल को जांच करने के लिए कहा है। अगर जांच में वह दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। -मोईनुल हक, सिटी मजिस्ट्रेट