दिवंगत सपा नेता सुरेंद्र मौखरी के परिजनों को सांत्वना देते सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव।
- फोटो : ORAI
उरई। सपा सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा दलित और पिछड़ों की विरोधी है।
नगर निकाय चुनाव पर आए हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ेगी।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने पहले सरकारी नौकरियों में पिछड़ों के आरक्षण को समाप्त किया। अब उनका राजनीतिक आरक्षण भी छीनना चाहती है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होने का अभी तक कोई निमंत्रण नहीं मिला है। अब नगर निकाय में खत्म किए गए आरक्षण का मुद्दा सामने है। इसलिए अन्य मुद्दों पर चर्चा का कोई औचित्य नहीं रह गया है। मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि वह डॉ. आंबेडकर के संविधान को समाप्त करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सपा कार्यकर्ताओं पर मुकदमे इसलिए लिखे जा रहे हैं कि कार्यकर्ता मुद्दे से भटकें।
झांसी से लौट रहे पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने निर्धारित समय 11:30 बजे के स्थान पर तीन घंटे देरी से ढाई बजे उरई पहुंचे। वह सपा के दिवंगत नेता और पूर्व जिला पंचायत सदस्य सुरेंद्र मौखरी के आवास पर पहुंचे और श्रद्धांजलि देते हुए उनके परिजनों को सांत्वना दी। इसके बाद कालपी विधायक विनोद चतुर्वेदी के आवास पर पहुंचे। यहां दस मिनट रुके। उन्होंने उनसे पार्टी के बारे में जानकारी ली। वह पूर्व मंत्री व पूर्व जिलाध्यक्ष इंद्रजीत यादव के आवास पर पहुंचे। वहां जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष आनंद यादव, शिवराम कुशवाहा, महेश द्विवेदी, जयशंकर सभासद से बातचीत की। सपा मुखिया जिला पंचायत सदस्य दीपराज गुर्जर के राजमार्ग स्थित आवास पर पहुंचे। वहां उन्होंने पदाधिकारियों के साथ भोजन किया। महेवा में पूर्व ब्लाक प्रमुख समर सिंह चौहान गुड्डू के आवास पर पहुंचे। यहां उनके भतीजे शिवाकांत की सड़क दुर्घटना में मौत होने पर शोक संवेदना व्यक्त की। इसके पहले उन्होंने ग्राम बैरई निवासी प्रधान दिनेश कुमार यादव के पुत्र की करंट से मौत पर सांत्वना दी।
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का सतेंद्र यादव दौनापुर के आवास पर स्वागत किया गया। गिल्लू चौहान एवं श्याम यादव ने पार्टी फंड में एक लाख रुपये अखिलेश यादव को सौंपे। एट टोल प्लाजा पर भी सैकड़ों सपा कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। आदर्श साक्षरता कर्मी समिति ने पूर्व सीएम अखिलेश यादव को ज्ञापन देकर प्रदेश के एक लाख 27 हजार से ज्यादा साक्षरता कर्मियों को 40 माह का बकाया वेतन दिलाने की गुहार लगाई।