फोटो 48 - स्टेशन की सड़क किनारे लेटे अभ्यर्थी। संवाद
उरई। जिले में आयोजित होने वाली प्रारंभिक पात्रता परीक्षा (पीईटी) शनिवार और रविवार को कुल 16 परीक्षा केंद्र पर होनी है। परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रयागराज, राजस्थान सहित अन्य जिलों से अभ्यर्थी शुक्रवार देर शाम से ही शहर पहुंचने लगे। प्रशासन की ओर से उनके ठहरने के लिए कोई व्यवस्था न किए जाने के कारण अभ्यर्थियों को खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ी।
शहर के सभी होटल पहले से ही फुल होने के कारण बाहर से आए अभ्यर्थियों को कमरे नहीं मिल पाए। कई अभ्यर्थी रातभर होटल की तलाश में इधर-उधर भटकते रहे, जबकि अधिकांश रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर ही जमीन पर बैठकर परीक्षा के दिन का इंतजार करते रहे। अभ्यर्थियों ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि प्रशासन उनकी ठहरने की व्यवस्था करेगा। यहां आकर उन्हें निराशा हाथ लगी। प्रयागराज से आए अभ्यर्थी आशुतोष, राजकुमार, कार्तिकेय, रजनीश कुमार, अमित सेंगर, राहुल कुमार, मुकेश मिश्रा आदि ने कहा कि न तो साफ-सफाई की कोई व्यवस्था थी और न ही सुरक्षा की। गंदगी से भरे माहौल में उन्हें पूरी रात जागकर बितानी पड़ी।
सबसे बड़ी समस्या उनकी सुरक्षा और सामान की देखरेख को लेकर रही। स्टेशन जैसी संवेदनशील जगहों पर किसी भी अप्रिय घटना का खतरा बना रहा। अभ्यर्थियों का कहना था कि यदि प्रशासन चाहे तो कम से कम टेंट लगाकर अस्थायी व्यवस्था कर सकता था, लेकिन इस ओर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया गया। अभ्यर्थियों का दर्द साफ झलक रहा था कि मेहनत और संघर्ष से परीक्षा देने पहुंचे युवा अगर पूरी रात भूखे-प्यासे और असुरक्षित माहौल में गुजारने को मजबूर हों, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रशासन की यह लापरवाही न केवल अभ्यर्थियों की परेशानी बढ़ा रही है बल्कि सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता को भी उजागर कर रही है।
जिले में आने वाले अभ्यर्थियों के लिए नौ जगहों पर व्यवस्था की गई है। जहां पर रुकने की व्यवस्था की गई है वहां पर स्टाफ लगाया गया है।उनके संचालक भी वहां मौजूद हैं।अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए सिटी मजिस्ट्रेट व सीओ सिटी को लगाया गया है।
राजेश कुमार पांडेय, डीएम जालौन