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ठंड से बेहाल रहे लोग

Fri, 09 Dec 2016 11:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
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धुंध और ठंड से परेशानी। - फोटो : अमर उजाला
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मंगलवार देर रात से शुरू हुआ धुंध का सिलसिला चौथे दिन शुक्रवार को भी जारी रहा। इस दौरान लोगों को घर से बाहर निकलने में काफी दिक्कतें हुईं। धुंध और गलन के चलते ट्रैफिक भी रेंगता रहा। सबसे ज्यादा परेशानी किसानों को हुई जो रात भर जागकर अपने खेतों की रखवाली कर रहे हैं। तीन दिनों में ठंड से जिले में अब तक दो मौतें हो चुकी हैं। वहीं ठंड के
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प्रकोप को देखते हुए अमर उजाला की खबर का असर हुआ। गुरुवार शाम से ही उरई, कोेंच, कालपी और जालौन आदि इलाकों के नगरीय क्षेत्रों में अलाव जलाए गए। इस दौरान तापमान में भी भारी गिरावट हुई। अधिकतम तापमान तो तीन डिग्री बढ़कर करीब 18 डिग्री सेल्सियस हो गया लेकिन न्यूनतम तापमान में 1 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई।

सर्दियां शुरू होते ही धुंध और कोहरे के कहर से आम जनजीवन प्रभावित होने लगा है। शुक्रवार को भी ठंड और गलन ने लोगों को परेशान किए रखा। वहीं कोहरे के चलते बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी हुई। विजिबिलिटी कम होने से सड़कों पर गाड़ियां रेंगती दिखीं। हाईवे पर भी धुंध के चलते गाड़ियों की रफ्तार थमी रही। उधर, रेल सेवाएं भी बाधित हुईं। शुक्रवार को भी
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ठंड से आम जिंदगी पटरी से उतरी दिखाई दी। उधर, उरई नगर पालिका के ईओ रविंद्र कुमार ने बताया कि ठंड की समस्या को देखते हुए शहर के करीब आधा दर्जन क्षेत्रों में अलाव की व्यवस्था की गई है। अलाव जलवाने से गरीब लोगों को खासी राहत मिलेगी।

अन्ना पशुओं ने बढ़ाई परेशानी
ठंड के बीच अन्ना पशु इस समय किसानों के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। पिछले दिनों उरई के किसानों ने ग्रामीण क्षेत्रों से करीब 500 से अधिक अन्ना पशुओं को उरई शहर और कलेक्ट्रेट क्षेत्र में छोड़ दिया। तीन चार दिनों के दौरान अन्ना पशुओं से अपने फसल की रखवाली करते दो किसानों की मौत भी हो चुकी है। ऐसे में किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। किसान राजेश शंकर, महेंद्र प्रताप, सतीश कुुमार, राजेंद्र शंकर आदि ने मांग की कि प्रशासन जल्द से जल्द गोशालाओं का निर्माण कराए ताकि अन्ना पशुओं की समस्या से निजात मिल सके।

स्कूलों में बच्चों की संख्या रही कम
ठंड और गलन के बीच शुक्रवार को स्कूलों में बच्चों की संख्या भी काफी कम रही। परिषदीय स्कूलों में बच्चों की अनुपस्थिति का ग्राफ ज्यादा रहा। ग्रामीणों का कहना था कि ठंड बीत जाए तो बच्चे स्कूल जाएं। वैसे भी बच्चों के पास पहनने के लिए ढंग के कपड़े तक नहीं हैं। ऐसे में लोगों ने बच्चों को घर पर रखना ही ज्यादा सही है। हालांकि उरई के कुछ निजी स्कूलों में

छात्र उपस्थिति थोड़ी सुधरी सी दिखाई दी। कुठौंदा, कदौरान, मुहम्मदाबाद, रमपुरा, चिल्ली, गुढ़ा, बंधौली, टिमरो, गोरन, जैसारी कला, आदि गांवों में स्थापित प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सर्दी के कारण बच्चों की संख्या काफी कम रही। कई स्कूलों में अध्यापक ही पहुंचे।
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