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Jalaun News: प्रकृति परीक्षण एप से एकत्रित किया जा रहा है मरीजों का डाटा

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उरई। मरीजों का इलाज अब प्राकृतिक परीक्षण के आधार पर किया जाएगा। इसके लिए आयुर्वेदिक विभाग ने प्रकृति परीक्षण एप शुरू किया है। इस एप के माध्यम से व्यक्ति के लक्षण का पता लगाकर सटीक इलाज कर सकेंगे। साथ ही मरीजों को मौसम के आधार पर बीमारियों को लेकर सचेत किया जाएगा। आयुष मंत्रालय के निर्देश पर जिला स्तर पर प्राकृतिक परीक्षण एप के माध्यम से मरीजों का डाटा एकत्रित किया जा रहा है। अब तक 2014 लोगों का डाटा एकत्रित किया जा चुका है।
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क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. सत्येंद्र सिंह ने बताया कि मरीज की प्रकृति समझकर उसके आधार पर जीवनशैली की सलाह का पालन कर बीमारियों से बच सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्रकृति परीक्षण ऐसा एप है, जो स्वास्थ्य की जानकारी एकत्रित करता है। मोबाइल पर एप डाउनलोड कर स्वास्थ्य संबंधी 23 से अधिक सवालों का जवाब देना होता है। इसमें शरीर का वजन, कितना तापमान, शरीर का रंग, बाल, नाखून, दांत, ओंठ, भौंह, चेहरा, हाथ, पैर आदि कैसे है, इसका ब्योरा भरना होता है। शरीर की लंबाई, शरीर का आकार, अगर पहले से कोई रोग या ऑपरेशन हुआ है तो उसकी जानकारी विकल्प चुनकर देनी होती है। सभी जानकारियां देने पर एक क्यूआर कोड जेनरेट होता है। विशेषज्ञ उस क्यू आर कोड को स्कैन कर प्रकृति बताएगा कि अब किस दोष से पीड़ित है। उन्होंने बताया कि वात, पित्त और कफ तीन प्रकार के दोष होते है। हर दोष की अपनी विशेषता, गुण व कार्य होते हैं। दोषों के असंतुलन व विकृति के कारण हमारा शरीर बीमार पड़ता है।
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