उरई। नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि बाल मजदूरी खत्म करने में सबसे बड़ी बाधा हमारी सोच और समाज की उदासीनता है। इसे किसी सरकार या कानून पर नहीं थोपा जा सकता, बल्कि यह हम सभी की जिम्मेदारी है।
रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान उनसे पूछा गया कि भारत में आज भी लाखों बच्चे मजदूरी करने को मजबूर हैं, ऐसे में बाल मजदूरी खत्म करने में सबसे बड़ी बाधा क्या है। इस पर उन्होंने कहा कि यदि कोई भी बच्चा गुलामी कर रहा है तो इसका मतलब है कि हम अभी पूरी तरह सभ्य नहीं हुए हैं और हमारा विकास अधूरा है।
उन्होंने कहा कि समाज के हर व्यक्ति को इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और यह संकल्प लेना चाहिए कि किसी भी बच्चे से मजदूरी नहीं कराई जाएगी। जब तक समाज इस दिशा में जागरूक होकर जिम्मेदारी नहीं निभाएगा, तब तक बाल मजदूरी को पूरी तरह खत्म करना मुश्किल रहेगा। कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि बच्चों को शिक्षा और सुरक्षित बचपन देना समाज और देश के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।