आटा (जालौन)। अटरिया-नसीरपुर संपर्क मार्ग का तीन किलोमीटर हिस्सा ध्वस्त होने से लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं संपर्क मार्ग से जुड़े गांव के लोगों को मुख्यालय या थाने जाने के लिए पंद्रह किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर भी आने-जाने में काटने पड़ते हैं। इसके अलावा सड़क में हो गए बड़े-बड़े गड्ढों में गिरकर अक्सर ग्रामीण चुटहिल भी हो जाते हैं।
ब्लाक डकोर के ग्राम अटरिया और नसीरपुर का संपर्क मार्ग करीब तीन किलोमीटर बदहाल हालत में है। इस संपर्क मार्ग से अटरिया, सधारा, नसीरपुर, नूरपुर, औता, हैदलपुर आदि गांव के लोग आवाजाही करते हैं। ध्वस्त सड़क का निर्माण न होने से ग्रामीणों को मुख्यालय व थाना जाने के लिए 15 किमी का चक्कर लगाना पड़ता है। सड़क पर बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे यह रास्ता और बदहाल हो जाता है। इस कच्ची सड़क के लिए अटरिया गांव के ग्रामीणों ने कई बार अफसरों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की, मगर अभी तक ग्रामीणों को इस समस्या से निजात नहीं मिल सका।
अटरिया के ग्रामीणों का कहना है कि अगर इस जर्जर कच्ची सड़क से दो पहिया वाहन से निकलते हैं, तो गड्ढों की वजह से गिरकर घायल होते हैं। कई बार सड़क हादसे भी हो चुके हैं, लेकिन फिर भी अभी तक इस ओर किसी अधिकारी व जनप्रतिनिधि ने ध्यान नहीं दिया, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही सड़क का निर्माण नहीं हुआ तो वही सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करेंगे, जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
सड़क खस्ताहाल है। इससे आवागमन में परेशानी होती है। सड़क बनवाने को अफसरों के साथ जनप्रतिनिधियों से की शिकायत कर चुके है, लेकिन चुप्पी साधे हैं।
-अरविंद राजपूत, अटरिया।
अगर आटा थाने जाना हो तो मुसमरिया से होते हुए करीब 15 किलोमीटर का चक्कर लगाकर जाना पड़ता है। एक घंटे का समय बर्बाद कर थाना तक पहुंच पाते हैं।
-जागेश्वर महाराज, अटरिया।
खराब रास्ते से एंबुलेंस पहुंचने में काफी समय लगता है, जिससे मरीज की हालत बिगड़ जाती है। लोगों अस्पताल आने जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
-गुलाब खान, अटरिया।
गांव के छात्र-छात्राएं आटा व उरई के स्कूल में पड़ते हैं। सड़क खराब होने से उन्हें स्कूल जाने के लिए इकहरा और मुसमरिया गांव होते हुए घूम कर जाना पड़ता है।
-लालाराम, अटरिया।