उरई (जालौन)। शीत लहर शुरू होने के बावजूद गोशाला में बंद गोवंश को सर्दी से बचाने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। पिछले वर्ष लगाए गए तिरपाल फट चुके हैं, ज्यादातर गोशालाओं में टिनशेड भी गोवंश की क्षमता के अनुसार कम हैं। रात में गोवंश ठंड से ठिठुर रहे हैं। चारे और पानी की भी समस्या बनी हुई है।
कदौरा। क्षेत्र में 20 स्थायी और 36 अस्थायी गोशालाएं हैं। ग्राम जकसिया, गोहना, रैला, इकौना, हरचंद्रपुर, चतेला, बड़ागाव, बबीना, कुशमरा बावनी सहित दर्जनों गांवों की गोशालाओं में सर्दी से बचाव के कोई इंतजाम नहीं दिखाई दे रहे हैं। गोवंश खुले में बैठते हैं। इस संबंध में बीडीओ अतिरंजन सिंह ने कहा कि सेक्टर प्रभारियों व सचिवों व्यवस्था दुरुस्त करने के आदेश दिए गए हैं। अलावा के साथ चारा पानी के इंतजाम खुद जाकर देखेंगे।
आटा। क्षेत्र की कुछ गोशालाओं में हीटर लगाने का दावा है लेकिन अलाव के लिए लकड़ी तक मुहैया नहीं है। तिरपाल भी नहीं लगाए गए हैं। परासन और आटा की गोशालाओं की ज्याद खराब है। यहां चारे-पानी काइंतजाम ठीक नहीं है। 100 से 150 क्षमता वाली गोशालाओं में करीब तीन सौ मवेशी रात को बंद कर दिए जाते हैं। परासन प्रधान लक्ष्मण निषाद ने बताया कि तिरपाल और अलाव के लिए लकड़ी प्रशासन से मांगी गई है। आटा प्रधान सत्यनारायन वर्मा तिरपाल लगवाने की बात कही है।
अधूरी पड़ी गोशाला
सरावन। माधौगढ़ ब्लाक की ग्राम पंचायत सरावन में गोशाला अधूरी है। अन्ना मवेशी खेतों और गांव में घूमते रहते हैं। मवेशी फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। (संवाद)