उरई (जालौन)। कोरोना महामारी में कुछ कमी आने पर सउदी सरकार ने हज और उमरा की यात्रा के लिए अनुमति दे दी है। यात्रा के लिए सात नवंबर से आवेदन भी शुरू हो गए हैं। हज पर जाने के लिए 10 दिसंबर तक आवेदन कर सकते हैं।
इस बार सउदी सरकार ने हज यात्रा के लिए उम्र सीमा भी तय कर दी है। 18 वर्ष के युवक से 65 साल तक के बुजुर्ग ही हज पर जा सकेंगे। यात्रा के लिए ली जाने वाली किस्त में भी बढ़ोतरी कर दी गई है। अभी तक पहली किस्त में 81 हजार जमा करने होते थे, अब 1.50 लाख रुपये जमा करने होंगे। ज्यादातर लोगों को यात्रा की किस्त बढ़ने की फिक्र नहीं है लेकिन उम्र की सीमा बढ़ने से मायूस हैं। इस बार हज यात्रा की तैयारी में लगे लोगों का कहना है कि सावधानी पूर्वक यात्रा पूरी करेंगे और दुआ करेंगे कि दुनिया से कोरोना महामारी हमेशा के लिए खत्म हो जाए।
लग नहीं रहा था कि देखेंगे मदीना
मुहम्मदाबाद निवासी इस्लाम (60) का कहना है कि हज यात्रा की अनुमति की खबर से बेहद खुशी हुई है। अब लग रहा है कि मदीना देखने की हसरत पूरी हो जाएगी। बेटों से कह दिया है कि मेरा रजिस्ट्रेशन कराने में चूके नहीं। इस मर्तबा तो मदीना जाएंगे और कुछ साथी भी साथ में जाने की तैयारी कर रहे हैं।
उम्र की सीमा 65 से 70 वर्ष हो
उरई के बजरिया निवासी निजामुद्दीन (62) का कहना है कि पहली बार हज के लिए 65 वर्ष से अधि की उम्र वालों पर पाबंदी लगाई गई है। कोरोना से बचाव के लिए ये बंदिश ठीक तो है लेकिन उम्र सीमा 70 वर्ष तक कर दिया जाता तो और बेहतर होता। ज्यादातर लोग बुढ़ापे में ही हज पर जाते हैं।
अम्मी को लेकर हज पर जाएंगे
उरई के गणेशगंज निवासी नबी अहमद (36) का कहना है कि दो-तीन साल से हज पर जाने की सोच रहे थे। लाकडाउन ने उम्मीद ही खत्म कर दी थी। अब हज की अनुमति से खुशी बढ़ गई है। अम्मी भी हज के लिए तैयार हैं। अम्मी को लेकर जाएंगे।
किस्त की रकम घटनी चाहिए
उरई के शिवपुरी निवासी साबिया (55) ने कहा कि इस बार हज जाने की पूरी तैयार कर रखी है। सरकार ने पहली किस्त में करीब 50 हजार रुपये बढ़ा दिए हैं, इसे कम करना चाहिए। लोग जीवन भर की कमाई जोड़कर हज पर जाते हैं, उनका भी ध्यान रखा जाना चाहिए।