फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

धुंए, ध्वनि से खुद भी बचे, दूसरों को भी बचाएं

विज्ञापन
बाजार में सजी पटाखे की दुकान। - फोटो : ORAI
विज्ञापन
उरई (जालौन)। कोरोना महामारी के बीच पड़ रही दिवाली पर सतर्कता बरतने की जरूरत है। पटाखों का धुआं स्वस्थ हुए कोरोना मरीजों, बच्चों, बुजुर्गों, सांस रोगियों और गर्भवती महिलाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए जरूरी है कि दो गज दूरी और मास्क जरूरी मूलमंत्र के साथ दिवाली पर पटाखों से भी दूरी बनाए रहें।
विज्ञापन

डॉक्टरों की सलाह है कि दिवाली पर कम से कम आतिशबाजी जलाएं, हर्बल आतिशबाजी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। फैक्ट्रियों, ईंट भट्ठों के धुएं के साथ ही कच्ची सड़कों से उड़ने वाली धूल जिले में प्रदूषण बढ़ा रही है। दिवाली पर पटाखे जलाने से प्रदूषण और बढ़ने की आशंका है।
पटाखों से बढ़ेगा प्रदूषण
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ सत्यप्रकाश ने कहा कि सर्दी ने दस्तक दे दी है। कुछ दिन बाद दिवाली है। दिवाली पर पटाखों से प्रदूषण बढ़ने की आशंका है। लिहाजा पटाखों से दूरी बनाए रहें, इससे खुद स्वस्थ रहेंगे और पर्यावरण भी बेहतर होगा।
विज्ञापन

कोरोना संक्रमित रहें सावधान
मेडिकल कालेज के कोविड अस्पताल के प्रभारी डॉ मनोज वर्मा का कहना है कि कोरोना संक्रमण कम नहीं हुआ है। पटाखों का धुआं कोरोना से ठीक हुए लोगों के फेफड़ों को संक्रमित कर सकता है। संक्रमित रहे लोग तो पटाखों के आसपास भी न जाएं। अच्छा होगा कि घर में किसी को पटाखे का न प्रयोग न करने दें।
पटाखा रहित दिवाली मनाएं
कोविड एल-1 हास्पिटल के प्रभारी डॉ संजीव प्रभाकर का कहना है कि दिवाली की आतिशबाजी के धुएं से पर्यावरण प्रभावित होता है। हवा में प्रदूषण बढ़ जाता है। धुएं से सांस के रोगियों की दिक्कत भी बढ़ जाती है। पटाखों से वातावरण में सल्फर की मात्रा बढ़ती है। प्रयास करें कि पटाखा रहित दिवाली मनाएं।
ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ता है
डॉ कौशल किशोर का कहना है कि वायु प्रदूषण के साथ ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ता है। पटाखों के तेज धमाके कान को नुकसान पहुंचाते हैं। बच्चों और बुजुर्गों को बहुत ही सावधानी बरतनी की आवश्यकता है। वायु और ध्वनि को प्रदूषण से बचाने के लिए दिवाली पटाखों से दूर रहना ही ठीक होगा।
दिवाली पर कमरे से नहीं निकलते हैं
आटा निवासी 75 वर्षीय श्याम बाबू गुप्ता ने बताया कि दिवाली की देर रात बहुत शोर और धुआं रहता, इससे अपने कमरे से बाहर नहीं निकलते हैं। अगले दिन सुबह बाहर निकलने पर भी सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है। लोगों को पटाखे जलाने से बचना चाहिए तभी पर्यावरण स्वस्थ रहेगा।
गर्भवती महिलाएं सतर्क रहें
आटा की मीरा तिवारी ने बताया कि कई बार पटाखे हादसों को अंजाम दे देते हैं। आतिशबाजी का धुआं गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक है। जिन घरों में गर्भवती महिलाएं हों वहां पटाखे बिल्कुल भी न छुड़ाए जाएं। पटाखों के धुएं और तेज आवाज से गर्भ में बच्चे को भी नुकसान पहुंच सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें