उरई। पर्यावरण प्रबंधन सिस्टम (ईएमएस) सही ढंग से लागू करने पर झांसी मंडल के उरई समेत पांच रेलवे स्टेशनों को अंतर्राष्ट्रीय मानक संगठन (आईएसओ) की ओर से प्रमाणपत्र दिया जाएगा। आईएसओ के लीड आडीटर ने बुधवार को उरई स्टेशन पर पहुंचकर स्टेशन अधीक्षक एपी वर्मा से प्रमाणपत्र के प्रारूप पर हस्ताक्षर कराए। अब 25 जनवरी को स्टेशन अधीक्षक को आईएसओ प्रमाणपत्र दिया जाएगा।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने रेलवे बोर्ड को निर्देश दिया था कि स्टेशनों पर पर्यावरण प्रदूषण की रोकथाम सुनिश्चित की जाए। इस पर रेलवे बोर्ड ने अभियान चलाकर पर्यावरण प्रदूषण रोकने के कई उपाय भी किए थे। यही नहीं उपाय कितने कारगर हुए है, इसका तीसरी पार्टी (थर्ड पार्टी) से सर्वे भी कराया था। रेलवे बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट एनजीटी और रेलवे बोर्ड को भेजी थी। मैगनम कंसलटेंट लखनऊ के लीड आडीटर प्रदीप सिंह बुधवार को उरई स्टेशन पहुंचे और उन्होंने स्टेशन अधीक्षक से मुलाकात कर उन्हें इस बात की बधाई दी कि स्टेशन को आईएसओ (14001:2015) के लिए चुना गया है। उन्होंने प्रमाणपत्र के प्रारूप पर स्टेशन अधीक्षक के हस्ताक्षर भी कराए।
लीड आडीटर ने बताया कि झांसी मंडल के उरई के अलावा ललितपुर, दतिया, डबरा और मुरैना को भी आईएसओ प्रमाणपत्र दिया जाना है। उनकी संस्था 25 जनवरी को यह प्रमाणपत्र देगी। उन्होंने बताया कि इन स्टेशनों ने आईएसओ को मानकों का पालन किया है। स्टेशन तथा यहां से गुजरने वाली ट्रेनों को प्रदूषण मुक्त करने की कार्रवाई में अब तेजी आएगी। बायो टॉयलेट और ई टॉयलेट (स्वचालित) की स्थापना होगी। कचरा निस्तारण मशीन भी लगाई जाएगी। ध्रूमपान को भी सख्ती से रोका जाएगा। जेनरेटर का कम से कम प्रयोग हो, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा। सोलर लाइटों को बढ़ावा मिलेगा। इस दौरान सीसीआई अनूप सक्सेना, सुनील भदौरिया, एसके सोनकर, लेखराज राजपूत, केसी वर्मा आदि भी मौजूद रहे।
इन मानकों पर मिलता है प्रमाणपत्र
- पर्यावरण संरक्षण
- कचरा निस्तारण
- ऊर्जा संरक्षण
- जल संरक्षण
- उच्च स्तरीय यात्री सुविधाएं
- कार्यस्थल पर साफ सफाई सुनिश्चित
- स्टेशन पर लगी मशीनों का रखरखाव
- सोलर पैनल और सोलर लाइटों का प्रयोग
यह होगा लाभ
आईएसओ प्रमाणपत्र मिलने के बाद उरई स्टेशन की ग्रेडिंग बढ़ सकती है। अब स्टेशन को ए प्लस श्रेणी का दर्जा भी मिल सकता है। स्वचालित सीढ़ी भी लगाई जाएगी और और क्लार्क रूम भी बनेगा।