उरई। एनीमिया मुक्त भारत (एएमबी) के लिए धर्मगुरु भी अहम भूमिका निभाएंगे। सीएमओ कार्यालय में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने धर्मगुरुओं के साथ बैठक कर रणनीति बनाई। तय हुआ कि जुमे की नमाज एवं तकरीरों में धर्मगुरु एनीमिया के कारण और इससे होने वाले नुकसान तथा बचाव के उपाय के बारे में समय-समय पर लोगों को बताकर जागरुक करते रहेंगे। धर्मगुरुओं ने भी सहयोग का आश्वासन दिया।
प्रभारी सीएमओ डा. सत्यप्रकाश ने कहा कि धर्मगुरु एनीमिया के प्रति समुदाय में फैली भ्रांतियों को दूर करें और समय-समय पर बैठक का आयोजन करें और अभियान को सफल बनाएं। किसी भी जानकारी व मदद के लिए निकटवर्ती स्वास्थ्य कर्मियों से संपर्क करें। एएमबी अभियान के नोडल अधिकारी डा. एसडी चौधरी ने कहा कि एनीमिया स्वास्थ्य संबंधी प्रमुख समस्या है। यह सभी आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित करता है। खून में लौह तत्व की कमी को एनीमिया कहते है। एनीमिया के लक्षणों में आंखें, नाखून व जीभ सफेद हो जाती है, भागदौड़ में थकावट आ जाती है, एकाग्रता में कमीए पढ़ाई में मन न लगना, बैठकर, लेटकर उठने में चक्कर आना, चेहरे और पैरों में सूजन आ जाना प्रमुख है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार जिले में 15 से 49 साल तक की 61.8 फीसदी महिलाएं तथा 84.8 फीसदी छह माह से 59 माह के बच्चे एनीमिया से ग्रस्त है। यूनीसेफ के डिवीजनल रिसोर्स पर्सन संजय ने एनीमिया मुक्त भारत के लिए सबके सहयोग को जरूरी बताया। इस दौरान एचईओ अरविंद सिंह, शहर इमाम हाफिज मंजूर, जमील, मौलाना शमसुल कमर, मुहम्मद मुबीन, राजू मंसूरी, अनीस, सगीरउद्दीन आदि रहे।
खाने में हरी पत्तेदार सब्जीए गुड़, चुकंदर, अनार व गुड़, अमरूद, केला, गाजर, नारंगी जैसे विटामिन वाले पदार्थ खाए, गर्भवती महिलाए और किशोरियों को नियमित आयरन की गोली खानी चाहिए, भोजन के बाद चाय के सेवन से बचना चाहिए।