कोंच बार के वकीलों ने मंगलवार को तहसीलदार न्यायालय का बहिष्कार कर दिया। वकीलों ने बैठक कर तहसीलदार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया। इस दौरान वकीलों ने नारेबाजी भी की। बैठक में प्रस्ताव पारित किया कि तहसीलदार के यहां से हटाए जाने तक वे तहसील अदालतों का बहिष्कार जारी रखेंगे।
बार संघ के अध्यक्ष अंबरीश रस्तोगी की अध्यक्षता एवं महामंत्री अरुण कुमार वाजपेयी के संचालन में मंगलवार को तहसील स्थित बार भवन में वकीलों की एक आपात बैठक हुई। बैठक वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजीव तिवारी एवं एक अन्य अधिवक्ता रामकुमार खरे के प्रार्थना पत्रों पर संज्ञान लेकर बुलाई गई थी। इन पत्रों में तहसीलदार जितेन्द्र पाल पर कथित रूप से भ्रष्टाचार के
आरोप लगाए गए हैं। संजीव तिवारी का आरोप है कि तहसीलदार के न्यायालय में उन्होंने एक वाद दायर किया था जो केवल इसलिए लंबित पड़ा है कि सुविधा शुल्क नहीं दिया गया। अधिवक्ता रामकुमार खरे ने भी अवगत कराया कि उनके दस वाद तहसीलदार के न्यायालय में लंबे समय से लंबित हैं। इन पर भी आदेश नहीं किया जा रहा है। बैठक के बाद अधिवक्ता
नारेबाजी करते हुए तहसीलदार के चेंबर की ओर बढे़। वकीलों ने कहा कि तहसीलदार को हटाए जाने तक आंदोलन जारी रहेगा। इस दौरान अंबरीश रस्तोगी, अरूणकुमार वाजपेयी, केदारीलाल पाठक, सुरेन्द्र शर्मा, विनोद अग्निहोत्री, शौकतअली, संतोष नायक, संजीव तिवारी, रामकुमार खरे, राघवेन्द्र आनंद विदुआ, सरनामसिंह यादव, संतोष खरे आदि मौजूद रहे।
दबाव बनाना चाहते हैं अधिवक्ता-तहसीलदार
वकीलों द्वारा अपने खिलाफ खोले गये मोर्चे को लेकर तहसीलदार जितेंद्रपाल का कहना है कि जिन वकीलों ने उनके ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं, वे उन पर अनावश्यक दबाव बनाकर नियम विरुद्ध कार्य कराना चाहते हैं। अधिवक्ताओं से अभद्रता करने का आरोप तो बिल्कुल ही हास्यास्पद है।