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सिर्फ कागजों में ओडीएफ, गांवों में अधूरे पड़े शौचालय

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आटा में पैसा न मिलने से अधूरा पड़ा शौचालय दिखाता गृहस्वामी - फोटो : ORAI
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उरई। भले ही जिला प्रशासन ने जिले को ओडीएफ घोषित कर दिया हो, लेकिन हकीकत इससे कुछ अलग है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अधूरे पड़े शौचालय प्रशासन के इस वादे की पोल खोल रहे है। जिले में दर्जनों ऐसे गांव है जहां सैकड़ों लाभार्थियों के शौचालय पूरे नहीं होने से लोग खुले में शौच जाने के लिए मजबूर है। योजना की स्थिति यह है कि कहीं पहली किस्त मिलने के बाद दूसरे किस्त के लिए ग्रामीण जिम्मेदारों के महीनों चक्कर लगा रहे हैं तो कहीं प्रधान व सचिव ने गड्ढा खुदवाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली है। जिले में अधूरे पड़े शौचालय ओडीएफ की हकीकत बयां कर रहे है।
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आटा क्षेत्र के पांडेयपुर गांव में अधूरे शौचालय को बनवाने के लिए लाभार्थी पिछले कई महीनों से जिम्मेदारों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन अब तक उसका शौचालय नहीं बन सका। गांव के रहने वाले राजकुमार पुत्र कुंजीलाल ने बताया छह माह पूर्व उसका शौचालय योजना में चयन हुआ था। चयन के बाद उन्होंने गड्ढा खोदा था। निरीक्षण के बाद करीब उन्हें पहली किस्त की चेक दी गई। इसके बाद वह दूसरी किस्त के लिए छह माह से प्रधान व ब्लाक के अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अभी तक उसको दूसरे किस्त का पैसा नहीं मिला, जिस वजह से उसका शौचालय पूर्ण नहीं हो सका, इससे उसे मजबूरन खुले में शौच जाना पड़ रहा है।
शौचालय योजना की हकीकत सरावन गांव में देखने को मिलती है। जहां करीब एक साल से बजट के अभाव में 987 शौचालय अधूरे पड़े है। कई बार ग्रामीणों व प्रधान ने ब्लाक के अधिकारियों से बजट की मांग की, लेकिन किसी ने भी सुध नहीं ली। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अनिल याज्ञिक ने बताया कि पिछले साल गांव में 1887 शौचालय स्वीकृत हुए थे, जिसमें से 900 शौचालयों को पूर्ण करा कर उन्हें सुचारु करा दिया गया है। शेष 987 शौचालय के पात्रों को इसकी जानकारी दे दी गई है। कुछ ने गड्ढे भी पूर्ण करा लिए हैं, लेकिन बजट न मिलने से शौचालय नहीं बनाए जा सके। कई बार उन्होंने शौचालय योजना में बजट की मांग को लेकर ब्लाक के अधिकारियों को ज्ञापन दिया, लेकिन अब तक किसी ने भी सुध नहीं ली।
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महेबा ब्लाक में शौचालय योजना की स्थिति काफी दयनीय है। प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी से ब्लाक के कई गांवों में अधूरे पड़े शौचालय योजना को मुंह चिढ़ा रहे हैं। स्थिति यह है कि ब्लाक के ग्राम साहजापुर निवासी रामजी पुत्र नत्थू सिंह ने बताया कि जनवरी माह में प्रधान ने उन्हें बताया कि उनका चयन शौचालय योजना में हो गया है और गड्ढा खोदने के लिए कहा, प्रधान के कहने के बाद उन्होंने गड्ढा तो खोद लिया, लेकिन तब से लेकर अब तक उन्हें पहली किस्त का पैसा नहीं मिला। जबकि कई बार सर्वे भी हो चुका है और फोटो भी खींची जा चुकी है, लेकिन अब तक उन्हें प्रथम किस्त का पैसा नहीं मिला। जिससे उनका शौचालय निर्माण सिर्फ गड्ढों तक सीमित रह गया है। डीपीआरओ अभय यादव का कहना है कि शौचालय योजना में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन गांवों में शौचालय अधूरे रहे गए है उन गांवों में जांच कराकर जल्द अधूरे शौचालयों को पूर्ण कराया जाएगा।

सरावन में अधूरा पड़ा शौचालय- फोटो : ORAI

महेबा में शौचालय के लिए खुदा पड़ा गड्ढा- फोटो : ORAI

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