जिला महिला अस्पताल में हावी अव्यवस्थाओं को अमर उजाला ने मुद्दा बनाकार प्रकाशित किया तो अस्पताल प्रशासन भी नींद से जागा है। जिस नर्स स्टाफ कक्ष में एक दिन पहले तक ताला था वह रविवार को खुल गया। कक्ष को न केवल खोला गया बल्कि वहां नर्सों को ड्यूटी करने भेजा गया। ड्यूटी पर आई नर्सों ने भर्ती मरीजों की ड्रेसिंग की और पूरे समय मौजूद
रहीं। अचानक बदली व्यवस्था से मरीजों और उनके तीमारदारों ने राहत की सांस ली है। जिला महिला अस्पताल में मरीजों को भर्ती कर उन्हें बेहतर उपचार देने की व्यवस्था है। खासकर प्रसूताओं के लिए तो अस्पताल में रुकना अनिवार्य भी है। शासन की मंशा के मुताबिक व्यवस्थाएं भी की गईं लेकिन उन पर अमल कम हो रहा था। इससे मरीजों व उनके तीमारदारों को
भी परेशान होना पड़ता था। अमर उजाला ने इसे मुद्दा बनाकर प्रमुखता से खबरें प्रकाशित कीं। इस पर अस्पताल प्रशासन हरकत में आ गया। रविवार को वार्ड एक, दो, तीन व चार के
लिए बना हर समय बंद रहने वाले नर्स स्टाफ कक्ष का ताला खोला गया। मरीजों की पट्टी की गई। पूरा रिकार्ड कक्ष में रखा गया। मरीजों को परेशानी होने पर नर्सों को बुलाने के लिए तीमारदारों को भागना नहीं पड़ा। इसके पहले जननी सुरक्षा योजना के तहत भर्ती मरीजों को भोजन और दूध के साथ फल का इंतजाम भी खबर प्रकाशित होने के बाद ही किया गया था।
अमर उजाला की पहल लाई रंग
अस्पताल में भर्ती मरीज के तीमारदार बघौरा निवासी राजू, नया पाठक पुरा निवासी कमला, राजेंद्र नगर निवासी राकेश समेत मौजूद तीमारदारों ने कहा कि वह जब अपने मरीजों को लेकर यहां आए थे तब नर्स स्टाफ कक्ष में ताला लटका था। रविवार को अमर उजाला में खबर पढ़ी और फिर जब वार्ड में पहुंचे तो वहां पर सबकुछ बदला हुआ था। नर्सों के व्यवहार में भी बदलाव नजर आया। यह सब अमर उजाला की पहल का असर है, इसके लिए अमर उजाला को धन्यवाद।
यहां की लापरवाही से दो जान को खतरा
समाज सेवी यूसुफ अंसारी का कहना है कि जिला महिला अस्पताल में तो लापरवाही का मतलब एक नहीं दो जान को खतरा होता है। अस्पताल प्रशासन को चाहिए कि लापरवाह स्टाफ को चेतावनी दे और फिर भी न माने तो कार्रवाई होनी चाहिए। अमर उजाला ने बीते कुछ दिनों से अस्पताल की एक के बाद एक कई समस्याओं को उजागर किया, यह एक अच्छी पहल है।
जिला प्रशासन को देना चाहिए ध्यान
पूर्व सभासद देवेंद्र यादव ने कहा कि अमर उजाला ने जिस तरीके से जिला महिला अस्पताल की हकीकत बयां की उसे देखते हुए जिला प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। यहां पर वह मरीज अधिक संख्या में आते जिनके पास नर्सिंग होम में इलाज कराने के लिए पैसा नहीं होता है। अस्पताल प्रशासन मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ न होने दे।
बोले जिम्मेदार
अस्पताल में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का लगातार प्रयास रहता है। ओपीडी से लेकर लेबर रूम और ओटी कक्ष का निरीक्षण भी करते है मरीजों से भी बात करते है, और जहां पर सुधार की गुंजाइश हती है की जा रही है।-डा. सुनीता बनौधा, सीएमएस जिला महिला अस्पताल उरई