उरई। बुंदेलखंड के मिनी पंजाब के नाम से मशहूर जालौन के मटर किसानों के लिए एक सुकून देने वाली खबर है। अब यहां के हरी मटर पैदा करने वाले किसानों की उपज की खरीदारी अंतराष्ट्रीय कंपनी करेगी।
एफएमसीजी सेक्टर की बड़ी कंपनी आईटीसी लिमिटेड के साथ पांच अन्य फर्मों से भी मटर खरीद का समझौता किया गया है। ये सभी फर्में दो किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से खरीदारी करेंगी। प्रशासन की सकारात्मक पहल के चलते इन सभी फर्मों और किसान संगठनों के बीच एक समझौता (एमओयू) हो गया है। इसकी शर्तें भी निर्धारित कर ली गईं हैं। इससे किसानों को कई तरह के फायदे मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
जालौन का किसान हरी मटर की खेती बहुतायत में करता है। अभी उसे अपना माल मंडी में बिचौलियों को औनेपौने दामों में बेचना पड़ता है। कुछ किसानों का माल दिल्ली, गाजियाबाद और हापुड़ के व्यापारी खरीदकर ले जाते हैं। इन किसानों को अपना माल व्यापारियों और बिचौलियों की शर्तों पर ही बेचना पड़ता है। इससे किसानों को जो फायदा होना चाहिए, वह फायदा बिचौलिये उठा लेते हैं।
बिचौलिये किसानों का माल तो ले जाते हैं, लेकिन उनका भुगतान मनमाने तरीके से करते हैं। कई बार तो किसानों का भुगतान एक-एक साल तक अटका रहता है। अब यह स्थिति बदलने जा रही है।
हरी मटर की फली का भाव हर रोज कोंच मंडी को मानक मानते हुए तय होगा। हरी मटर खरीदने वाली फर्म तीन कार्य दिवस में एफपीओ को भुगतान करेगी और एफपीओ किसान को तीन कार्य दिवस के अंदर भुगतान करेंगे। इस लिहाज से किसानों को लगभग एक सप्ताह के अंदर उनकी उपज का भुगतान मिल जाएगा।
मटर की गुणवत्ता तय करने में भी फर्म और एफपीओ की मनमानी नहीं चलेगी। मटर की गुणवत्ता तय करने के लिए एक कमेटी तय कर दी गई है। यही कमेटी मटर की चार तरह की श्रेणी तय करेगी, उसी के हिसाब से किसानों को उनकी उपज का भुगतान किया जाएगा।
मटर खरीद में आने वाली लागत जैसे परिवहन, लेबर, वारदाना आदि का खर्च भी फर्म को खुद ही उठाना पड़ेगा। अभी बिचौलिये इसके खर्च की कटौती किसानों के भुगतान में से कर लेते हैं। किसानों को एक फीसदी मंडी टैक्स से भी छुटकारा मिल जाएगा। किसान से 12 से 18 रुपये प्रति क्विंटल पल्लेदारी की वसूली की जाती है, यह बंद हो जाएगी।
किसानों और हरी मटर की खरीद करने वाली कंपनी के बीच दो किसान उत्पादक संगठन पुल का काम करेंगे। इनमें डकोर मटर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड और जालौन ग्रीन पीज प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड शामिल हैं। यह दोनों किसान उत्पादक संगठन किसानों से मटर खरीदकर फर्मों को देंगे। इन दोनों एफपीओ को 30 पैसे प्रति किलो के हिसाब से कमीशन तय किया गया है।
1- आईटीसी लिमिटेड
2- मेसर्स शांति शीतगृह प्रा.लि. उरई।
3- मेसर्स एसएस अंकित, फ्रोजन फ्रूट्स एंड वेजिटेबल्स उरई।
4- राज फ्रोजन प्रोडक्ट, उरई।
5- भूक्रांति किसान उत्पादक संगठन
6- सोनू मौर्या ट्रेडर्स लखनऊ।
सरकार की मंशा के अनुसार हम किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। किसानों से अपील की जा रही है कि वे बिचौलियों को मटर बेचने के बजाय किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से मटर बेचें। आगे हमारा प्रयास रहेगा कि कंपनियां यहां आकर अपनी फ्रोजन इकाइयां स्थापित करें, जिससे रोजगार की संभावनाएं बढ़ सकें।
- चांदनी सिंह, जिलाधिकारी, उरई।