उ.प्र. व म. प्र में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण म.प्र की चंबल नदी में आई बाढ़ का पानी छोडे़ जाने से यमुना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। मंगलवार को खतरे का निशान 108 मी. पार करते हुए दोपहर तक 80 से.मी. ऊपर पंहुच जाने से यमुना के किनारे बसे देवकली, मंगरौल, गुढ़ाखास ,मदरा लालपुर सहित दर्जनों गांव पानी से घिर गए हैं, वहीं क्षेत्र के
किसानों की सैकड़ों एकड़ फसलें नष्ट हो गई। यमुना नदी का जल स्तर 50 से.मी प्रति घंटे बढ़ने से जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। हालांकि अब दो सेमी. प्रतिघंटा की दर से जलस्तर बढ़ रहा है। पिछले दिनों खतरे के निशान से पार हुई बेतवा तो अब स्थिर हो गई है लेकिन यमुना खतरे के निशान से करीब 80 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। ऐसे में कालपी से कई
गांवों का संपर्क टूट गया है। आवागमन के लिए जौंधर रपटा व रायण नाले पर नाव चलाई जा रही है। केंद्रीय जल आयोग के कर्मचारी ज्ञान सिंह के अनुसार म.प्र. की चंबल नदी का पानी आने से सोमवार से यमुना नदी का जल स्तर 50 से.मी प्रति घंटे बढ़ रहा था। इस कारण जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। अब पानी के बढ़ने की ऱफ्तार कम होकर 2 से. मी.प्रति घंटा रह गई है। वही उपजिलाधिकारी जलराजन चौधरी ने बाढ़ क्षेत्र का दौरा कर जायजा लिया तथा बाढ़ चौकियों पर तैनात राजस्व कर्मियों को एलर्ट किया है।
एसडीएम ने किया निरीक्षण, देखे हालात
उपजिलाधिकारी जलराजन चौधरी बाढ़ क्षेत्र का निरीक्षण करते हुए व्यास क्षेत्र जौंधर नाला रपटे पर पहुंचे। वहां चल रही नाव चालकों को बुलाकर लोगों से कम पैसा लेने व नाव पर दो बाइकों से अधिक नाव पर न लादने की हिदायत दी तथा वहां मौजूद किसानों से परेशानी की जानकारी ली।
गांवों का कटा संपर्क
कालपी। यमुना नदी में आयी बाढ़ से नदी के किनारे बसे गांव मंगरौल, कीरतपुर, हीरापुर, शेखपुर गुढ़ा, गुढ़ाखास देवकली व तहसील के आगे बसे गांव रायड़, मदरालालपुर सहित दो दर्जनों गांवों का सम्पर्क कालपी से टूट गया है। वही गुढ़ाखास के प्रधान सोने लाल निषाद का कहना है कि बाढ़ से नदी के किनारे बसे कई गांव पानी से घिर गये है तथा खड़ी फसलें नष्ट हो गयी है। बही बाढ़ के कारण दोनों रपटे पर नावें चलाईं जा रही हैं।