अंतर्राज्यीय सीमा को जोड़ने वाले उरई-कोंच मार्ग का हाल बेहाल है। इस मार्ग की हालत यह है कि 28 किलोमीटर सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। सड़क पर कई फीट गहरे गड्डों में गिरकर रोज वाहन चालक चुटहिल हो रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा इस मार्ग को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है, व्यापारिक व अन्य दृष्टि से यह मार्ग काफी महत्वपूर्ण है।
जिले को मध्य प्रदेश सीमा से जोड़ने वाला उरई- कोंच मार्ग बीते कई वर्षों से अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। लंबा अरसा बीतने के बाद अभी तक इस सड़क के दिन नहीं बहुर सके हैं। लोक निर्माण विभाग द्वारा हर साल सड़क के रखरखाव के नाम पर लाखों रुपये खर्च कर दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत पर काम नहीं किया जाता।
रखरखाव के नाम पर सड़क के गड्डों में मिट्टी व कूड़ा भरवाकर औपचारिकताएं पूरी कर दी जाती हैं और ठेकेदार अधिकारियों की मिलीभगत से लाखों रुपये की रकम डकार जाते हैं। इस सड़क के नाम पर कई सालों से लोक निर्माण विभाग में रुपये का बंदरबांट करने का खेल चल रहा है।
अधिकारियों व ठेकेदारों की इस मिलीभगत का खामियाजा जिलेे के लोगों को भुगतना पड़ रहा। अब इस सड़क की हालत यह हो गई है कि 28 किलोमीटर लंबा यह मार्ग पैदल चलने लायक भी नहीं रहा। सड़क पर कई फीट गहरे गड्डे हो चुके हैं।
दोपहिया वाहन चालक रोज इन गड्डों में गिरकर चुटहिल हो रहे हैं, जबकि छोटे चार पहिया वाहनों का इस मार्ग से गुजरना मुश्किल है। मजबूरी में छोटे चार पहिया वाहन चालकों को कोंच तक जाने के लिए अन्य मार्गों का सहारा लेना पड़ता है। विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली से जिलेवासियों में रोष है।
व्यापारिक दृष्टि से भी यह मार्ग काफी महत्वपूर्ण है। इस मार्ग से मध्य प्रदेश की सीमा जुड़ती है। मध्य प्रदेश से आने वाला अधिकांश माल इसी मार्ग से उरई लाया जाता है। सड़क की हालत खराब होने से व्यापारियों को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
वर्तमान वित्तीय वर्ष में लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़क के निर्माण व चौड़ीकरण को 44 करोड़ रुपये की कार्ययोजना शासन को भेजी गई थी। कुछ दिनों में ही शासन से बजट जारी होने की संभावना है। चिंता का विषय यह है कि कहीं फिर से सड़क के लिए आने वाले बजट का बंदरबांट न हो जाए।