शासन की कथनी करनी में अंतर के चलते परिषदीय विद्यालयों में पठन-पाठन व्यवस्था में सुधार नहीं आ रहा है। जुलाई में स्कूल खुलने के बाद से अब तक बच्चों को न तो किताब-कापी मिलीं और न ही यूनिफार्म। इससे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह चौपट है। विभागीय अधिकारी 5 अगस्त तक किताबें और यूनिफार्म बांटे जाने की बात कह रहे हैं। आधे से
ज्यादा महीना बीत चुका है और किताबें नहीं मिलने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित है। शासन की ओर से भले ही परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा का स्तर बढ़ाने का दावा किया जाता हो लेकिन शिक्षण सत्र 2016-17 का दूसरा सेशन जुलाई से शुरू होने के बाद से अब तक स्कूलों में पढ़ाई हुई ही नहीं। वहीं परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को नि:शुल्क दी जाने वाली
किताबें और यूनिफार्म शासन की ओर से जिले के बच्चों को अभी तक मुहैया नहीं हो पाई हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई गुणवत्ता के अनुसार नहीं हो पा रही है। ऐसे में परिषदीय विद्यालयों से अभिभावकों का सरकारी स्कूलों से मोह भंग होता जा रहा है। शनिवार को डकोर क्षेत्र में अमर उजाला टीम परिषदीय विद्यालयों की व्यवस्थाएं देखने पहुंची। इसमें 60 फीसदी स्कूली बच्चे बगैर यूनिफार्म दिखाई दिये। तो कुछ बच्चों को किताबों के अभाव में शिक्षक ब्लैकबोर्ड पर शिक्षा देते नजर आए। एक रिपोर्ट-
सीन - 1
प्राथमिक व कन्या प्राथमिक विद्यालय कुसमिलिया दोनों विद्यालय एक ही प्रांगण में अलग-अलग बिल्ंिडगों में संचालित हैं। इन स्कूलों में बच्चों की संख्या ठीकठाक नजर आ रही थी लेकिन 60 फीसदी बच्चों ने यूनिफार्म नहीं पहनी थी। बच्चों से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि पिछली साल की ड्रेसें हैं जो फट गई हैं। इस बार मिली नहीं हैं। इससे वे अपने घरेलू कपड़े पहन कर आ रहे हैं।
सीन - 2
कन्या प्राथमिक विद्यालय मुहम्मदाबाद में बच्चों की संख्या तो संतोषजनक थी लेकिन यहां भी पाठ्य पुस्तकों के अभाव में छात्र एक-दूसरे का मुंह ताकते नजर आ रहे थे। प्रधानाध्यापिका ने बताया कि अभी विद्यालय को पुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं। इसके लिए खंड शिक्षाधिकारी को अवगत करा दिया गया है। जैसे ही पुस्तकें प्राप्त होंगी उन्हें बच्चों को वितरित कर पढ़ाई का कार्य नियमानुसार शुरू करा दिया जाएगा।
सीन नंबर-3
कन्या पाठशाला मुहम्मदाबाद में भी पाठ्य पुस्तकों की उपलब्धता न होने की ही बात सामने आयी और यहां बगैर यूनिफार्म के बच्चे स्कूल में पढ़ने के लिए मौखिक रिवीजन करते नजर आए। वहीं, कुछ बच्चों को प्रधानाध्यापिका और सहायक अध्यापिकाएं ब्लैक बोर्ड पर पढ़ाती दिखीं। विद्यालय बिल्ंिडग में लिखी गिनती, पहाड़े और अक्षरों की वर्णमाला से बच्चों को अक्षर पहचानने के बारे में अध्यापिकाओं द्वारा बताया जा रहा था।
बोले जिम्मेदार...
परिषदीय विद्यालयों की पाठ्य पुस्तकों को लेकर शासन से पत्र जारी हो चुका है। पुस्तकों की खरीद प्रक्रिया चालू है और 4 से 5 अगस्त तक परिषदीय विद्यालयों को पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध करा दी जाएंगी और इसके बाद स्कूली बच्चों यह किताबें नि:शुल्क बटवाई जाएंगी।-जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, प्रदीप कुमार पांडेय।