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Jalaun News: विनोद के पाला बदलते ही कालपी में नई सियासी बिसात

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फोटो 37 विनोद चतुर्वेदी - फोटो : ArchivE
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उरई। कालपी विधानसभा क्षेत्र में सपा विधायक विनोद चतुर्वेदी के भाजपा में शामिल होने से आगामी चुनाव के समीकरण बदलने के आसार हैं। बुधवार को अपने समर्थकों के साथ भाजपा में आए विनोद के कदम से सपा के सामने नए नेतृत्व की तलाश और अपना जनाधार बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। वहीं, भाजपा को उनके व्यक्तिगत प्रभाव से मजबूती की उम्मीद है। बसपा वीरपाल चौहान के नाम के सहारे संभावनाएं तलाश रही है, जबकि कांग्रेस के सामने भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की चुनौती है।
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वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के विनोद चतुर्वेदी को 69,782 वोट मिले थे। निषाद पार्टी के छोटे सिंह 66,966 मतों के साथ दूसरे और बसपा के श्याम पाल उर्फ छुन्ना पाल 64,683 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। विनोद की जीत का अंतर 2816 वोट था, जबकि दूसरे और तीसरे प्रत्याशी के बीच महज 2283 मतों का फासला था। कांग्रेस प्रत्याशी उमाकांति को भी 15,195 वोट मिले थे।

करीबी मुकाबले के इन आंकड़ों के बीच विनोद का भाजपा में जाना महत्वपूर्ण है। हालांकि, उनके पिछले चुनाव के सभी वोट भाजपा को मिलने का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। मतदाताओं का रुख प्रत्याशी की स्वीकार्यता, स्थानीय मुद्दों और दलों की रणनीति से तय होगा। (संवाद)
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भाजपा के सामने प्रभाव को वोट में बदलने की चुनौती

विनोद चतुर्वेदी के आने से भाजपा को चुनावी अनुभव रखने वाला चेहरा मिला है। ब्राह्मण समुदाय से आने वाले विनोद का व्यक्तिगत प्रभाव पार्टी के लिए उपयोगी हो सकता है, लेकिन इसका लाभ स्वत: मिलना तय नहीं है। भाजपा को अपने पुराने दावेदारों और विनोद के समर्थकों के बीच तालमेल भी बैठाना होगा। टिकट के फैसले में संतुलन बनाना पार्टी की अहम परीक्षा होगी।

सपा को नए चेहरे से उम्मीदें जोड़नी होंगी

विनोद के जाने के बाद सपा के सामने ऐसा प्रत्याशी चुनने की चुनौती है, जो संगठन को एकजुट रखने के साथ विभिन्न सामाजिक समूहों में स्वीकार्य हो। पाल, कुशवाहा, लोधी, यादव और अन्य पिछड़े वर्गों के साथ दलित तथा मुस्लिम मतदाताओं के बीच समर्थन बनाए रखना पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है। सबसे बड़ी कसौटी यह होगी कि पिछले चुनाव में विनोद के साथ रहे मतदाता सपा के साथ कितने टिकते हैं।

बसपा को पुराने प्रदर्शन से आस

2022 में 64,683 वोट पाने वाली बसपा दूसरे स्थान पर रहे छोटे सिंह से केवल 2283 मत पीछे थी। अब वीरपाल चौहान के नाम के बीच पार्टी की रणनीति पर निगाहें हैं। बसपा के लिए पुराने समर्थकों को एकजुट रखने के साथ नए मतदाताओं तक पहुंच बनाना जरूरी होगा।

कांग्रेस के सामने संगठन मजबूत करने की चुनौती

पिछले चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी उमाकांति को 15,195 वोट मिले थे। यह पार्टी के लिए अपनी स्थिति मजबूत करने का आधार हो सकता है, लेकिन पुराने मतों को आगामी चुनाव का निश्चित समर्थन नहीं माना जा सकता। कांग्रेस की भूमिका उसके प्रत्याशी, स्थानीय संगठन और जनसंपर्क पर निर्भर करेगी।
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