सीएमएस से शिकायत करता पीड़ित भाग्यचंद्र
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उरई। एंबुलेंस चालक की लापरवाही से शनिवार को एक नवजात बच्ची की मौत हो गई और जच्चा की हालत बिगड़ गई। प्रसव पीड़ा शुरू होते ही पति ने 102 नंबर फोन पर एंबुलेंस बुलाई। करीब आधे घंटे बाद एंबुलेंस तो गांव पहुंची लेकिन चालक मरीज के घर से 300 पहले ही एंबुलेंस रोक दी। उसने गर्भवती के पति को स्ट्रेचर भी नहीं दिया। देरी होती देख पति रिश्तेदार की बोलेरो से पत्नी को अस्पताल ले जा रहा था लेकिन रास्ते में ही प्रसव हो गया और नवजात बच्ची की मौत हो गई। आरोप है कि अस्पताल मेें भी डॉक्टर प्रसूता को भर्ती नहीं कर रही थीं। सीएमएस से शिकायत करने पर उसे भर्ती किया गया।
डकोर ब्लॉक के वजीदा गांव निवासी भाग्यचंद्र की पत्नी संध्या गर्भवती थी। शनिवार सुबह उसको प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। इस पर भाग्यचंद्र ने 102 एंबुलेंस को फोन लगाया। भाग्यचंद्र का आरोप है कि आधे घंटे बाद एंबुलेंस चालक का फोन आया। उसने कहा कि सड़क खराब होने से आगे नहीं आ सक ते, मरीज को यहीं ले आओ। भाग्यचंद्र के अनुसार चालक ने घर से करीब 300 मीटर पहले ही एंबुलेंस खड़ी कर दी थी। भाग्यचंद्र ने बताया कि उसके मकान तक सीसीरोड बनी है और उस सड़क पर ट्रक भी जा जाते हैं। ये बताने के बाद भी चालक एंबुलेंस नहीं लाया। इस पर वह रिश्तेदार बोलेरो से पत्नी को अस्पताल ले जा रहा था। रास्ते में उसे प्रसव हो गया, कुछ देर बाद नवजात बच्ची की हो गई। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने प्रसूता को भर्ती करने से मना कर दिया। इसके बाद भाग्यचंद ने सीएमएस सुनीता बनौधा से शिकायत की। इसके बाद संध्या को भर्ती किया गया। सीएमएस ने बताया कि एंबुलेंस की शिकायतों की जांच और कार्रवाई लखनऊ से की जाती है।
चालक ने स्टेचर भी नहीं दिया
भाग्यचंद्र ने बताया कि जब चालक ने एंबुलेंस घर तक लाने से मना कर दिया तो वह एंबुलेंस के पास गया। उसने चालक से गर्भवती पत्नी को एंबुलेंस तक लाने के लिए स्ट्रेचर मांगा। किंतु उसे स्ट्रेचर नहीं दिया गया।
जांच को लखनऊ से आएगी टीम
भाग्यचंद्र ने बताया कि जब उसने गाड़ी घर तक न आने की शिकायत दोबारा 102 पर फोन मिलाकर की तो उधर से जवाब मिला है, घर तक की सड़क सही है या वाकई खराब है, इसके लिए एक जांच टीम भेजी जाएगी।