उरई। सीएमओ कार्यालय में हर सोमवार को संचालित होने वाले दिव्यांग बोर्ड का हाल बेहाल है। दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने आए दिव्यांगों के लिए न तो बैठने के पर्याप्त इंतजाम नजर आए और न ही अन्य सुविधाएं। 44 डिग्री के तापमान में दिव्यांग टिन शेड और पेड़ों के नीचे बैठकर धूप से बचाव करते नजर आए। उनके लिए न तो पंखे का इंतजाम दिखा और न ही कूलर का। जिस कक्ष में दिव्यांग बोर्ड बैठता है, वहां का एसी भी काम नहीं कर रहा था।
सीएमओ कार्यालय परिसर में हर सोमवार को दिव्यांग बोर्ड बैठता है। ऑनलाइन आवेदन करने के बाद दिव्यांगता की जांच कराने और चिकित्सकों की रिपोर्ट लगवाने के लिए बड़ी संख्या में दिव्यांग सुबह साढ़े नौ बजे से ही सीएमओ कार्यालय परिसर स्थित दिव्यांग बोर्ड के पास पहुंचने लगते हैं। हैरानी की बात यह है कि दिव्यांग बोर्ड का कोई भी चिकित्सक पौने 11 बजे तक नहीं पहुंचा था।
सबसे पहले हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. राम द्विवेदी पहुंचे। इसके बाद ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. गौरव आए और इसके बाद क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट अर्चना विश्वास पहुंची। तब तक दिव्यांग बोर्ड के बाहर दिव्यांग टिनशेड के नीचे तो कुछ पेड़ की छांव के नीचे धूप से बचाव करते दिखे। इसके बाद चिकित्सक आए और उन्होंने अपनी रिपोर्ट लगाई। 72 दिव्यांग पहुंचे। इसमें हड्डी रोग विशेषज्ञ ने 40 दिव्यांगों की जांच की। कुल 52 दिव्यांग चिह्नित किए गए।
पेड़ की छांव में मिला सहारा
कदौरा ब्लॉक के मंसगाया निवासी राजकुमार (45) पेड़ की छांव के नीचे लेटे थे। उन्होंने बताया कि उनके पैर और रीढ़ की हड़्डी टूटी है। सुबह साढ़े नौ बजे आ गए थे। दो घंटे से ज्यादा हो गया है, आठवां नंबर बताया गया था। अभी तक नंबर नहीं आया है। इस भीषण गर्मी में पेड़ की छांव के नीचे परेशान है। दिव्यांगों के लिए विभाग को विशेष प्रयास करना चाहिए।
कब जांच होगी, पता नहीं
लहारियापुरवा निवासी विशना देवी (62) पति मौजीलाल के साथ दिव्यांगता की जांच कराने पहुंची थीं। बताया कि सुबह साढ़े नौ बजे आ गए थे। बाहर टिन शेड के नीचे न तो पंखे हैं और न वाटर कूलर ठंडा पानी दे रहा है। भूख लगने लगी। इसलिए साथ लाए खाना खा रहे है। कब जांच होगी, पता नहीं।