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लापरवाही : दिव्यांग बोर्ड में डॉक्टर ने फिर मरीजों को कराया इंतजार

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उरई। सीएमओ कार्यालय में हर सोमवार को दिव्यांगता की जांच के लिए लगने वाले दिव्यांग बोर्ड में पहुंचने वाले चिकित्सकों की लेटलतीफी कम नहीं हो रही है। सोमवार को भी डॉक्टरों ने एक से डेढ़ घंटे तक दिव्यांगों को इंतजार कराया।
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हैरानी की बात यह रही कि जहां दिव्यांग बोर्ड बैठता है, वहां बिजली गुल थी। इसकी वजह से दिव्यांग परेशान रहे। बाद आनन फानन में दिव्यांगों को सीएमओ मीटिंग सभागार में बैठाया गया। हालांकि वहां भी बिजली नहीं आ रही थी। किसी तरह बिजली जोड़कर काम चलाया गया। परेशान होकर कई दिव्यांग लौट गए।

दिव्यांगता की जांच कराने के लिए दिव्यांग सुबह साढ़े नौ बजे से ही पहुंचने लगे थे। वहीं सुबह करीब 11 बजे ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. गौरव शर्मा पहुंचे। इसके बाद हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. मधुसूदन और फिर क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट अर्चना विश्वास आईं। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जेजे राम ने नेत्र अस्पताल से ही दिव्यांगता की जांच कर रिपोर्ट लगाई। डॉक्टरों के देरी से आने के कारण मरीज परेशान रहे।
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जिन मरीजों की दिव्यांगता की रिपोर्ट नहीं लग पाई, वह मायूस होकर लौट गए। हालांकि करीब एक से डेढ़ घंटे बिना बिजली के दिव्यांग परेशान रहे। एसीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह का कहना है कि पहले दिव्यांग बोर्ड के चिकित्सक अचल प्रशिक्षण केंद्र के परिसर में बैठते थे। वहां बिजली की समस्या थीं तो उन्हें सीएमओ मीटिंग सभागार में बैठाया गया। साथ ही बिजली व्यवस्था भी ठीक कराई गई।





तीन बार आ चुके हैं, डॉक्टर नहीं मिलते



माधौगढ़ के दिव्यांग राधाकृष्ण ने बताया कि उनका भतीजा शिवांग सिंह मानसिक रूप से कमजोर है। उसकी दिव्यांगता की जांच कराकर प्रमाणपत्र बनवाने के लिए तीन बार आ चुके हैं। डॉक्टर नहीं मिले। अस्पताल में भी पता किया तो वहां भी डॉक्टर नहीं मिले। सुबह साढ़े नौ बजे से परेशान घूम रहे हैं। साढ़े 11 बजे तक डॉक्टर नहीं आई हैं।




महेबा की सरोज बेटे शिवकुमार के साथ दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने पहुंचीं थीं। उन्होंने बताया कि उनका करीब दस साल पहले प्रमाणपत्र बना था लेकिन उसमें नाम गलत था। अब जब दोबारा पैर की दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने आई तो चिकित्सक ने यह कहकर रिपोर्ट लगाने से मना कर दिया कि सरकारी अस्पताल की एक्सरे रिपोर्ट लाओ। उसका एक पैर छोटा बड़ा है। इतनी दूर से आकर परेशान हुई।
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