नगर के 19 छोटे बड़े नालों और कागज फैक्ट्रियों से दूषित पानी यमुना के जल को दूषित कर रहा है। ये सब कुछ नगर पालिका प्रशासन और तहसील प्रशासन की नजर में है इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। नदी में गंदगी बढ़ने से स्नान और आरती के लिए आने वाले श्रद्धालुओं में निराशा है।
कालपी के छोटे-बड़े 19 नालों का गंदा पानी राजघाट और भैंसा नाले से यमुना में गिर रहा है। इसके अलावा नगर क्षेत्र की करीब पांच दर्जन कागज फैक्ट्रियों का केमिकल युक्त पानी भी यमुना नदी में गिराया जा रहा है। इससे यमुना के पानी में दुर्गंध आने लगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की लगातार चेतावनी के बाद भी फैक्ट्री मालिक ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगा रहे हैं। प्रशासन भी फैक्ट्री मालिकों पर नरमी बरत रहा है। यमुना बचाओ अभियान के संयोजक महंत जमुना दास महाराज ने बताया कि महीनों सैकड़ों मजदूरों के श्रमदान के बाद यमुना का ये स्वरूप नजर आ रहा है। सरकार यमुना में जाने से गंदगी को रोके और कारखानों में सख्ती के साथ ट्रीटमेंट प्लांट लगवाए। अवैध खनन भी प्रदूषण को बढ़ावा दे रहा है। कागज उद्यमी अभिषेक गुप्ता का कहना है कि कागज उद्योग तो पर्यावरण मित्र की श्रेणी में आता है। कागज उद्योग में ब्लीचिंग पाउडर का इस्तेमाल होने से फैक्ट्री से पानी साफ होकर निकलता है। शहर की गंदगी का ठीकरा प्रदूषण बोर्ड कागज ंउद्यमियों पर थोप देता है। 2014 में तत्कालीन डीएम रामगणेश द्वारा कराई गई जांच में कागज फैक्ट्रियों से निकलने वाला पानी शुद्ध पाया गया था। रविवार को श्री ढोड़ीश्वरघाट और श्री बिहारी घाट पर यमुना आरती होती है। हर त्यौहार पर दीपोत्सव भी होता है। इसके अलावा मकर संक्रांति आदि पर यमुना में स्नान के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। नदी का पानी गंदा होेने से श्रद्धालुओं में निराशा है।
वर्जन
जल्द ही यमुना नदी का निरीक्षण कर गंदगी गिराने वाले स्थानों को चिह्नित कराएंगे। गंदा पानी नदी में गिरने से रोकने के लिए प्रयास किया जाएगा। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से ही समस्या का स्थायी समाधान होगा। समस्या को डीएम के माध्यम से शासन तक पहुंचाया जाएगा।- सतीश चंद्र, एसडीएम