उरई। जिले के मुलायम सिंह का गहरा नाता था। जिले में अपने संघर्ष काल से लेकर मुख्यमंत्री काल तक मुलायम सिंह कई मर्तबा आए। उनके संस्मरण सुनाकर कई नेताओं की आंखें भर आईं। उन्होंने जिले को पांचवीं तहसील और मेडिकल कॉलेज की सौगात दी। इटावा-औरेया-जालौन को जोड़ने के लिए यमुना पर पुल भी बनवाए।
मुलायम सिंह उरई में अपने रिश्तेदार व पूर्व जिलाध्यक्ष इंद्रजीत यादव के यहां कई बार आए। इंद्रजीत यादव बताते हैं कि जब वह जिलाध्यक्ष थे, तब वर्ष 2004 में नेताजी सपा के जिला कार्यालय का उद्घाटन करने आए थे। स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली दूर करने के लिए उन्होंने मेडिकल कॉलेज की घोषणा भी की थी। इसके बाद वह आखिरी बार नौ जुलाई वर्ष 2005 में कोंच नगर में पूर्व विधायक दयाशंकर वर्मा की बेटी की शादी में भी पहुंचे थे। तब उन्होंने दयाशंकर को भरोसा दिया कि वह मेहनत करें, पार्टी उनके साथ रहेगी। जब तक मुलायम सिंह अध्यक्ष रहे। तब तक दयाशंकर वर्मा को लगातार पार्टी टिकट देती रही।
इसके पूर्व पार्टी के संघर्ष काल में भी उन्होंने कई मर्तबा कृषि मंत्री रहे चौधरी शंकर सिंह के यहां रुककर पार्टी के विस्तार का काम किया। उन्होंने छोटे से गांव डकोर के शिक्षक डॉ. चंद्रपाल यादव को पार्टी में आगे बढ़ाया। उन्हें राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी। हमीरपुर के जिला पंचायत अध्यक्ष रहे घनश्याम अनुरागी को जालौन जिले में लाकर पार्टी का टिकट दिया। घनश्याम ने चुनाव जीतकर जिले में सपा का लोकसभा में खाता खोला था।
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कालपी। मुलायम सिंह यादव ने जालौन में 18 अप्रैल वर्ष 1989 को 40 दिन की पदयात्रा पूर्व सीएम चंद्रशेखर के साथ कालपी से ही शुरू की थी। यहीं पर चौधरी मार्किट के सामने पदयात्रा समाप्त की घोषणा की थी, इसके बाद नबंबर वर्ष 1989 में ही वह पहली बार यूपी के सीएम बने।
कालपी क्षेत्र में मुलायम सिंह यादव का यहां के पूर्व विधायक स्व. चौधरी शंकर सिंह से करीबी नाता था। उनके यहां वह पारिवारिक सदस्य के तौर पर शामिल होते थे। सपा के वरिष्ठ नेता शिवबालक सिंह यादव बताते हैं कि जालौन में पदयात्रा निकालने के बाद ही वह पहली बार सीएम बने थे।