यूं तो हर मां के लिए उसका बेटा लाडला होता है। पर यदि एक मां का यही प्यार और दुलार जब त्याग और तपस्या में तब्दील होता है तो किसी भी बेटे की शोहरत की चमक सोने से कम नहीं होती है। जालौन जिले में डकोर ब्लाक के मुहम्मदाबाद गांव निवासी नफीसा बेगम ने भी गरीबी में संघर्ष करते हुए अपने बच्चों की कुछ ऐसी परवरिश की आज एक बेटी शिक्षिका तो बेटा झांसी में सेवायोजन अधिकारी के पद पर कार्यरत है।
दोनों ही भाई बहन जब अपनी मां के त्याग और तपस्या का जिक्र करते हैं तो उनकी आंखें नम हो जाती हैं। झांसी के सेवायोजन कार्यालय में सहायक जिला रोजगार के पद पर कार्यरत मोहम्मद वसीम ने बताया कि वह तो मां को दुनिया भर की मां से सबसे अलग मानते हैं।
उनका दस लोगों का परिवार था। जिसमें पांच बहन और 2 भाई। पिता मोहम्मद शाह घर पर ही लोगों के कपड़े सिला करते थे। ऐसे में हम भाई बहन का पढ़ना लिखना नामुमकिन था। ऐसे में एक मां ही थी जो आगे आई, कभी मकानों के बनने में सिर पर ईंट ढोने तो कभी खेतों में मजदूरी की लेकिन हम लोगों की पढ़ाई नहीं बंद होने दी।