उरई। दहेज हत्या में मा-बेटे को दोषी पाते हुए अदालत ने तीन-तीन साल की कैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
जालौन कोतवाली क्षेत्र के सिहारी दाऊदपुर निवासी बबलू वाल्मीकि ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी पुत्री की शादी 2013 में पहाड़गांव, कैलिया निवासी राहुल वाल्मीकि के साथ हुई थी। दहेज की मांग पूरी न होने पर 9 जुलाई 2013 को पुत्री आरती को खाने में कोई जहरीला पदार्थ खिला दिया था। जिससे उसकी हालत बिगड़ गई थी। गंभीर हालत में इलाज के लिए ले जाते वक्त रास्ते में आरती की मौत हो गई थी।
पुलिस ने सास-ससुर व बेटे के खिलाफ दहेज हत्या समेत कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की थी। घटना में कोई सबूत नहीं पाए जाने पर पुलिस ने एफआर लगाकर कोर्ट में भेज दी। इसमें हत्या की पुष्टि नहीं की थी। पीड़ित ने कोर्ट में एफआर को लेकर आपत्ति लगाई थी। जिसमे कोर्ट ने सास रामश्री, पति राहुल व ससुर सुम्मालाल को कोर्ट में तलब किया। ट्रायल के दौरान सुम्मालाल की मौत हो गई थी।
गुरुवार को स्पेशल जज डकैती कोर्ट डॉ अवनीश कुमार ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनीं और पत्रावलियों का अवलोकन किया। इसमें मां-बेटा को दोषी पाया गया। दोनों को तीन तीन साल की सजा सुनाकर 25-25 हजार रुपये जुर्माना लगाया।