जीआईसी में जनसभा को संबोधित करतीं बसपा सुप्रीमो मायावती।
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बसपा सुप्रीमो ने जीआईसी मैदान में आयोजित जनसभा में अल्पसंख्यकों को डराया कि भाजपा सत्ता में आई तो न सिर्फ उनका उत्पीड़न बढ़ेगा बल्कि आरएसएस के एजेंडे पर काम कर भाजपा दलितों का आरक्षण पूरी तरह से खत्म कर सकती है। उन्होंने कहा कि नोट बंदी के फैसले से 10 माह पूर्व भाजपा के बड़े नेताओं और धन्नासेठों का काला धन सफेद करा दिया गया था। इस चुनाव में भाजपा का हाल बिहार से भी ज्यादा खराब होगा।
मुलायम परिवार में चल रही खींचतान की ओर इशारा करते हुए कहा कि मुलायम ने पुत्र मोह में शिवपाल को अपमानित किया है। दोनों ही खेमे एक दूसरे को हराने में लगे है। इसका भी नुकसान सपा को उठाना पड़ेगा। सपा ने पिछले पांच सालों में आधे अधूरे विकास कार्य किए हैं, जो काम और योजनाएं सफल भी रही हैं, उनकी शुरुआत बसपा कार्यकाल में ही की गई थी। भाजपा के पास सीएम का कोई चेहरा नहीं है और सपा में सीएम का चेहरा स्वयं ही अपराधियों और माफियाओं से घिरा है। पूरे देश में अल्पसंख्यकों का गोरक्षा, लव जेहाद और आतंकवाद के नाम पर शोषण व उत्पीड़न किया जा रहा है।
बोलीं, उनकी सरकार बनने पर विभिन्न धर्म जातियों के जिन बेगुनाहों को झूठे मामलों में फंसाकर जेल भेजा गया है, समीक्षा कराकर उन्हें आजाद कराया जाएगा। थानों में पीड़ितों की सुनवाई होगी, व्यापारियों की सुरक्षा को आयोग गठित किया जाएगा और किसानों का बकाया भी उन्हें दिलाया जाएगा। इस मौके पर माधौगढ़ के प्रत्याशी गिरीश अवस्थी, कालपी से छोटे सिंह और फरई सीट से विजय चौधरी के अलावा बसपा के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
सभा के दौरान मायावती ने बुआ के संबोधन का जवाब दिया। कहा कि बबुआ के गुंडाराज से दुखी जनता उन्हें माफ नहीं करेगी। इस बार मूर्तियां और स्मारक नहीं बनवाने की बात दोहराई। जितनी देर मंच पर मायावती रहीं, कोई नेता और प्रत्याशी अपनी जगह से हिला नहीं। बाद में सभी ने मायावती के पैर छूकर आशीर्वाद जरूर लिया।