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टप्पेबाजी के आरोप में नाबालिग लड़कों को पीटा

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उरई/कोटरा। उरई कोतवाली में पुलिस प्रताड़ना से युवती की आत्महत्या का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब कोटरा पुलिस पर टप्पेबाजी के आरोप में अनुसूचित जाति के दो नाबालिगों की पिटाई करने के आरोप की बात सामने आई है। लड़कों के परिवार वालों ने शुक्रवार को डीएम दफ्तर पहुंचकर अधिकारियों से पुलिस की शिकायत की और बच्चों को लगीं चोटें भी दिखाईं। एएसपी डॉ अवधेश सिंह का कहना है कि शिकायत आई है, जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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क्षेत्र के गुमावली गांव निवासी भानुप्रताप पुत्र रामदयाल ने गुरुवार को पुलिस को बताया था कि वह एट स्थित स्टेट बैंक शाखा से 33 हजार रुपये निकालकर ग्राम ऐंधा जा रहा था। तभी पचोखरा मोड़ पर ऐेंधा निवासी 14 और 16 साल के दो लड़के मिले और लिफ्ट के बहाने बाइक पर बैठ गए। बीच रास्ते में उन्हीं लड़कों ने उसके बैग से रुपये निकाल लिए। इस पर पुलिस ने गांव के प्रधान की मदद से दोनों लड़कों को देर शाम कोटरा थाने बुलाया।
लड़कों के परिजनों का आरोप है कि देर रात तक पुलिस ने दोनों लड़कों की बेरहमी से पिटाई की और फिर शुक्रवार की सुबह आने के लिए कहते हुए परिजनों के सुपुर्द कर दिया। पिटाई के चलते शुक्रवार की सुबह दोनों नाबालिग लड़कों की हालत बिगड़ी तो गुस्साए परिजन ग्रामीणों के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थी। भीड़ के साथ ही दोनों घायल लड़के भी थे। जिलाधिकारी दफ्तर में परिजनों से प्रार्थना पत्र लेकर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। इस दौरान सुदामा, बलराम, रामजीवन, चंद्रभान, अच्छेलाल, लालाराम, सुखसिंह, शिवम, अक्षय कुमार सहित एक दर्जन से ज्यादा ग्रामीण मौजूद रहे। परिजनों के मुताबिक एक लड़का हाईस्कूल का छात्र भी है।
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मामला तूल पकड़ते ही पीछे हटी कोटरा पुलिस
शुक्रवार की सुबह जब नाबालिगों की बेवजह पिटाई के मामले ने तूल पकड़ा तो कोटरा पुलिस भी बैकफुट पर आ गई। न तो थाने का कोई सिपाही ही लड़कों को बुलाने उनके घर पहुंचा और न ही प्रधान अथवा थानेदार का कोई फोन ही परिजनों के पास आया। परिजनों का कहना है कि बिना किसी मामले की लिखापढ़ी के बच्चों को लाठी डंडों से बेरहमी से पीटा गया है।
मेडिकल कराकर पुलिस पर की जाए कार्रवाई
लड़कों के परिजनों का कहना है कि पीठ से लेकर पैरों तक पर लाठियों के लाल निशान अभी भी मौजूद हैं। दोनों लड़के पुलिस की बर्बरता से बेहद सहमे हैं, बार बार बेहोश भी हो रहे हैं। लिहाजा दोनों का मेडिकल परीक्षण कर दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
टप्पेबाज थे तो पुलिस ने छोड़ा क्यों
सीओ संतोष कुमार ने बताया कि कोटरा पुलिस के मुताबिक पकड़े गए दोनों लड़कों ने टप्पेबाजी की बात स्वीकार की थी। सीओ का कहना है कि लड़कों की पिटाई के संदर्भ में जांच की जाएगी। सीओ के बयान से सवाल यह उठता है कि यदि लड़कों ने टप्पेबाजी स्वीकारी थी तो पुलिस ने उन्हें गुरुवार की रात परिजनों को क्यों सौंपा, लिखापढ़ी क्यों नहीं की।
बेबसों पर ही चलता पुलिस का जोर
नीशू के मामले के बाद ही दोनों लड़कों की पिटाई के मामले ने पुलिस की छवि एक बार फिर धूमिल कर दी है। सामाजिक और राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों का कहना है कि दोषी पुलिस कर्मियों पर उचित कार्रवाई न होने से ही बर्बरता बढ़ती जा रही है। अपराध थम नहीं रहे हैं और पुलिस है कि अपना सारा जोर गरीब और बेबस लोगों पर ही दिखा रही है।
रुपये नहीं दिए तो कर देंगे एनकाउंटर
कलक्ट्रेट पहुंचे दोनों लड़कों के चेहरों पर पुलिस का खौफ साफ नजर आ रहा था। दोनों के सामने जब जब पुलिस का नाम लिया जाता तो वे आंखें और जुबान दोनों बंद कर लेते थे। बड़ी मुश्किल से एक लड़के ने इतना ही बताया कि मारते वक्त पुलिस वाले कहते जा रहे थे कि यदि रुपये नहीं दिए तो दोनों का एनकाउंटर कर दिया जाएगा।
इंसाफ के लिए भटक रहे नीशू के परिजन
करीब 13 दिन पहले पुलिस प्रताड़ना से आत्महत्या करने वाली नीशू के परिजन भी मजिस्ट्रेटी जांच के बावजूद इंसाफ के लिए भटक रहे हैं। परिजनों का कहना है कि जिस मोबाइल विक्रेता ने बेटी पर चोरी का झूठा इल्जाम लगाया और जिन लड़कों ने बेटी की फोटो खींची, उन्हें पुलिस ने अभी तक हाथ भी नहीं लगाया है।
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