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Jalaun News: न्यूनतम पारा 7.5 डिग्री, गलन भरी ठंड ने छुड़ाई कंपकंपी

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उरई। रविवार को न्यूनतम तापमान 7.5 डिग्री सेल्सियस पहुच गया। गलन भरी ठंड ने लोगों को कंपकंपी छुड़ा दी। शनिवार देर रात से छाया घना कोहरा रविवार की शाम तक बना रहा, जिससे दृश्यता बेहद कम हो गई। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर मौसम ऐसा ही रहा तो घने कोहरे की ओस से हरी मटर की फसल को पाले का खतरा हो सकता है।
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कोहरे के साथ ही जिले में गलन भरी सर्दी की शुरुआत हो गई है। ग्रामीण इलाकों में लोग अलाव जलाकर ठंड से बचते दिखे, जबकि शहर में भी चौक-चौराहों पर अलाव का सहारा लिया गया। लगातार कोहरे और बढ़ी नमी के कारण खेतों में ओस की बूंदें जमने लगी हैं। इससे हरी मटर और हरी सब्जियों पर पाले का सीधा खतरा मंडराने लगा है।
सुबह खेतों में फसलों पर सफेद परत जमी नजर आई। इसे देखकर किसानों की चिंता और बढ़ गई। किसान रामसेवक, मनोहर, दीपू, रिंकू आदि ने बताया कि यदि दो-तीन रातें और ऐसी ही रहीं तो मटर की फसल को नुकसान हो सकता है। किसान पहले ही लागत बढ़ने से परेशान हैं। अब पाला उन्हें परेशान करेगा।
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मौसम वैज्ञानिक कुलदीप गुप्ता का कहना है कि अभी तापमान लगातार नीचे बना हुआ है और कोहरे की वजह से नमी अधिक है। अगले 48 से 72 घंटे पाले की दृष्टि से बेहद संवेदनशील हैं। मौसम वैज्ञानिक मोहम्मद मुस्तफा के अनुसार जिले में अगले कुछ दिनों तक घना कोहरा और कड़ाके की ठंड बनी रह सकती है। न्यूनतम तापमान में और गिरावट की संभावना है।






ठंड का असर आम जनजीवन पर
ठंड बढ़ने से सुबह-शाम की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। बाजार देर से खुल रहे हैं और शाम ढलते ही बंद हो जा रहे हैं। अस्पतालों में सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है।


प्रमुख जगहों पर नहीं जल रहे अलाव
शहर के कई प्रमुख चौराहे से अलाव नदारद हैं। दिन के समय अलाव न जलने से लोग कूड़ा करकट जलाकर काम चला रहे हैं। रविवार की सुबह से ही शहर के प्रमुख शहीद भगत सिंह चौराहे पर अलाव नहीं जलाया गया। इससे लोग कूड़ा करकट जलाकर तापते नजर आए।

कूड़ा जलाकर ले रहे सर्दी से राहत

कोंच। कड़ाके की ठंड के बावजूद कई स्थानों पर अलाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो सकी। मजबूरी में राहगीरों और दुकानदारों को कूड़ा-कर्कट जलाकर सर्दी से राहत लेते देखा गया। बाजारों में मजदूर वर्ग अलाव के सहारे बैठे नजर आए, वहीं आसपास अन्ना पशु भी ठंड से बचने के लिए खड़े दिखे। ठंड और कोहरे के चलते बाजारों में अन्य दिनों की तुलना में कम भीड़ रही। जो लोग खरीदारी के लिए निकले, वे पूरी तरह गर्म कपड़ों में लिपटे नजर आए। दिनभर लोग आग तापते रहे और शाम ढलते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर गया।
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